नई दिल्ली. देश में आलू उत्पादन में यूपी नंबर वन है. पिछले साल यूपी में आलू की बंपर पैदावार हुई थी. किसानों को राहत देने के लिए योगी सरकार ने अपनी दूसरी ही कैबिनेट बैठक में ऐलान किया कि सरकार किसानों से आलू खरीदेगी कम से कम 4 रुपये 87 पैसे प्रति किलो का दाम चुकाएगी लेकिन अब हाल ये है कि कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू का कोई खरीदार ही नहीं है. नए आलू की कीमत इतनी कम मिल रही है कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहा है. जो आलू किसानों ने बड़ी उम्मीद से उगाया था उसे अब वह सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हो गया है. कई दिनों से खबर आ रही थी कि यूपी में किसान कई अलग अलग जगहों पर आलू फेंक रहे हैं. इस खबर पर जब सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो शुक्रवार रात किसानों ने लखनऊ का रुख किया और सारी रात वे वहां कि वीवीआईपी इलाकों में सड़कों पर आलू फेंकते रहे.

उन्होंने विधानसभा के बाहर, राजभवन के बाहर और सीएम योगी आदित्यनाथ के निवास के बाहर आलू फेंककर अपनी त्रासदी बताई. किसानों का कहना है कि अगर सरकार हमें लागत का रेट भी नहीं दे पा रही तो विरोध तो होगा ही. कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू को कोई खरीदने रो तैयार ही नहीं है. पुराने आलू की कीमत 20 से 30 पैसे मिल रही है जबकि इससे कहीं गुना ज्यादा तो कोल्ड स्टोरेज का किराया ही है. ऐसे में किसानों ने कोल्ड स्टोरेज के मालिकों से ही कह दिया है कि आलू बेचकर अपना किराया निकाल लो. लेकिन नए माल के लिए कोल्ड स्टोरेज को खाली करने के लिए कोल्ड स्टोरेज मालिक भी आलुओं को सड़कों पर फेंकने पर मजबूर हैं. इस पूरे मसले पर इंडिया न्यूज के कार्यक्रम महाबहस में चर्चा की गई.

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