नई दिल्ली. तीन तलाक है एक ऐसा मुद्दा है जिसे मुस्लिम समाज के धर्मगुरु और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड न तो सही साबित कर पा रहे हैं न ही इसे खत्म करने को तैयार है. तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अगस्त में अवैध करार दिया था. ऐसे में अब सरकार इसको लेकर कानून प्रस्तावित करने जा रही है तो मुस्लिम धर्म गुरुओं का कहना है कि इतनी जल्दी क्या है, ऐसे कानून की जरूरत क्या है. गुरुवार को केंद्र सरकार लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पेश करने जा रही है जिसमें तीन तलाक को न सिर्फ असंवैधानिक बताया गया है बल्कि तीन तलाक देने वाले के लिए 3 साल की सजा का प्रावधान भी है. इस बिल को लेकर अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ‘तमाम मुस्लिम देशों ने तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में रखा है. ऐसे में हमें भी सुधार की दिशा में आगे बढ़ना होगा और मुस्लिम महिलाओं का संवैधानिक अधिकार उनको देना हमारा मकसद है’.

मुस्लिम धर्म गुरुओं के विरोध के बावजूद मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से बचाने के लिए सरकार किसी भी हाल में इस बिल को पास कराना चाहती है. इसलिए बीजेपी के सभी सांसदों को 28 और 29 दिसंबर को संसद में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है. हालांकि सरकार ने विपक्ष से भी इसपर समर्थन मांगा है लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 24 दिसंबर को बैठक में आरोप लगाया था कि इस बिल से मुस्लिम महिलाओं की दिक्कतें ही बढ़ेंगी. बिल का विरोध होते ही विपक्ष को भी लगने लगा की सरकार की मंशा ठीक नहीं है. नए कानून से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को दिक्कत क्यों है? इसी मुद्दे को लेकर आज इंडिया न्यूज चैनल के कार्यक्रम महाबहस में इस मामले पर चर्चा हुई.

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