पिछले सोलह सालों में देश में जितने आतंकी हमले हुए उसमें किसी न किसी रूप में हाफिद सईद का नाम जरूर आया. संसद पर हमले के बाद अमेरिका आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने हाफिज को आतंकी माना वहीं विश्वभर में पाकिस्तान का आतंकियों के प्रति प्रेम किसी से छिपा नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान की फौज और उसकी सरकार की नजरों में हाफिज का रुतबा जरा भी कम नहीं हुआ. भारत सरकार के दबाव में पाकिस्तान ने आतंकी हाफिज सईद को आधा दर्जन बार नजरबंद किया लेकिन अदालत में उसके खिलाफ सबूत पेश न करके उसके बाहर आने रास्ते भी पाकिस्तान ने ही खोले.

पाकिस्तान का यही ड्रामा एक बार फिर दोहराया गया जब गुरूवार को हाफिज सईद को रिहा किया गया. बता दें कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को इसी साल जनवरी में नजरबंद किया गया था. फिलहाल रिहा होते ही आतंकी हाफिज ने न सिर्फ भारत के खिलाफ जहर उगला है बल्कि कश्मीर को आजाद कराने का बयान भी दिया है. हाफिज सईद की रिहाई के साथ ही 26/11 के मुंबई हमले के पीड़ितों के जख्म ताजा हो गए हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी निंदा तो की है लेकिन अब ये समझ नहीं आ रहा कि हाफिज को सबक किस तरह सिखाया जाए. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत को हाफिज सईद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने की जरूरत है? क्या भारत के लिए जरूरी हो गया है कि वह हाफिज को ठीक उसी तरह घेरकर खत्म कर दे जिस तरह अमेरिका ने आतंकवादी उसामा बिन लादेन को खत्म किया था.

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