नई दिल्ली. दिल्ली और देश के लिए अभिशाप बन चुका डेंगू से सैकड़ों लोग मरते हैं और ऐसे में सिस्टम और स्वास्थ सेवाओं पर सवाल उठता है लेकिन हालिया मामले में सवाल अस्पताल चला रहे लोगों की सोच पर उठता है. दरअसल दिल्ली के द्वारिका में रहने वाले जयंत सिंह की 7 साल की बेटी आध्या को डेंगू के इलाज के लिए गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया. आध्या 31 अगस्त से 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही लेकिन आध्या की हालत में जरा भी सुधार नहीं दिखा. इसके बावजूद अस्पताल बड़ी मुश्किल से आध्या को डिस्चार्ज करने के लिए राजी हुआ और आध्या के पिता को 15 दिन के इलाज का 16 लाख रुपये का बिल थमाया गया. डिस्चार्ज होने के थोड़ी देर बाद ही आध्या की मौत हो गई. ऐसे में बिल चुकाए बिना शव ले जाने से भी रोका गया.

आध्या की मां का कहना है कि 24 घंटों में आध्या को डाक्टर सिर्फ 5-10 मिनट के लिए देखते थे. साथ ही उन्होंने कहा कि इंफेक्शन की बात कह कर उन्हें आध्या से न मिलने को भी कहा गया था. उन्होंने बताया कि बेटी को कितना खून चढ़ाया जाता था ये बताए बिना सीधे बिल थमा दिया जाता था.

बेटी की मौत के सदमे से उभरने के बाद आध्या के पिता ने अस्पताल के बिल पर सवाल उठाया तो अस्पताल ने खर्च का ब्यौरा गिना दिया और कहा कि बिल में सभी प्राइवेट मेडिकल प्रोटोकॉल को ध्यान में रखा गया है. मामले में केंद्री. स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा ने जांच के आदेश दिए हैं.

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