नई दिल्ली: 68 साल में सिविल जज की कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक में अयोध्या विवाद पर कानूनी बहस चल रही है. अब इस विवाद को श्री श्री रविशंकर बहस की बजाय बातचीत से सुलझाने की कोशिश में लगे हुए हैं. शिया वक्फ बोर्ड के साथ उनकी मुलाकात हो चुकी है. मंगलवार को वो लखनऊ पहुंचे जहां संभावना है कि वे सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे. उसके बाद 16 नवंबर को अयोध्या भी जा रहे हैं. लेकिन अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या श्री श्री रविशंकर राम मंदिर का विवाद सुलझा पाएंगे? क्या मंदिर – मस्जिद जमीन के झगड़े में सुलह की गुंजाइश अब भी बची है.

अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन राम जन्मस्थान है या बाबर के सेनापति मीर बांकी की बनवाई बाबरी मस्जिद. ये सवाल 68 साल से फैजाबाद के मजिस्ट्रेट की कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक में गूंज रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट भी करीब दो दशक तक सबूतों और गवाहों पर गौर करने के बाद साफ – साफ नहीं बता पाया कि विवादित ज़मीन राम जन्म भूमि है या बाबरी मस्जिद. हाईकोर्ट ने तीनों पक्षकारों को बराबर का हिस्सेदार बताकर मुकदमा निपटाया, लेकिन एक तिहाई हिस्से पर कोई पक्षकार राज़ी नहीं हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जिसके तत्कालीन चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने मार्च में कहा था कि मंदिर – मस्जिद के सभी पक्षकार आपस में समझौता कर लें तो बेहतर रहेगा. ये पेशकश भी कबूल नहीं हुई.

अब सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसंबर से अयोध्या ज़मीन विवाद की अंतिम सुनवाई होने जा रही है. उससे पहले ही आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर इस विवाद की मध्यस्थता करने में जुट गए हैं. विवादित ज़मीन के नए दावेदार शिया वक्फ बोर्ड के नेताओं के साथ श्री श्री रविशंकर की मुलाकात हो चुकी है. शिया वक्फ बोर्ड साफ कह चुका है कि अयोध्या में विवादित ज़मीन पर राम मंदिर ही बनना चाहिए. श्री श्री को उम्मीद है कि नए माहौल में उनकी पहल से कोई ना कोई रास्ता ज़रूर निकलेगा, इसीलिए वो 16 नवंबर को अयोध्या पहुंच रहे हैं, ताकि मंदिर और मस्जिद के पैरोकारों के साथ मिल – बैठकर कोई फॉर्मूला निकाला जा सके.

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