नई दिल्ली: बलात्कारी राम रहीम जेल में है, देशद्रोह की आरोपी उसकी मुंहबोली बेटी भी गिरफ्तार हो चुकी है, लेकिन ये सवाल कायम है कि क्या राम रहीम के जेल जाने के बाद उसके डेरे और करीबियों पर सरकारों की मेहरबानी बंद हो चुकी है ? क्या राम रहीम को अब भी राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है ? हनीप्रीत की गिरफ्तारी के बाद पंजाब और हरियाणा सरकारों के बीच तू-तू, मैं-मैं क्यों हो रही है, आज इसी मुद्दे पर होगी महाबहस.
 
दो साध्वियों का बलात्कार करने वाला राम रहीम पंजाब और हरियाणा में अपने अंधभक्तों के वोट से राजनीति की दिशा तय करता था. उसका ये दबदबा ही था कि हरियाणा में उसके समर्थक अदालती फैसले से पहले खूनी इरादों के साथ इकट्ठा हो गए और हरियाणा सरकार मूकदर्शक बनी रही. इसके लिए हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट की फटकार भी झेलनी पड़ी.
 
राम रहीम को सज़ा होने के बाद उसके राजदारों की गिरफ्तारी के मामले में भी हरियाणा सरकार की फजीहत हुई. देशद्रोह की आरोपी हनीप्रीत की गिरफ्तारी में हरियाणा पुलिस की 38 दिनों की नाकामी सवालों में घिरी रही. इसका कोई जवाब हरियाणा पुलिस के पास नहीं था कि हनीप्रीत वकील से मिलकर, मीडिया को इंटरव्यू देकर आसानी से फरार कैसे हो जाती है ?

 
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