नई दिल्ली: बैंगलुरू में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर कोहराम मच गया है. असहनशीलता वाली बहस एक बार फिर शुरू हो गई है, क्योंकि गौरी लंकेश के परिचित और विरोधी पार्टियों के नेता आरोप लगा रहे हैं कि गौरी लंकेश को एक खास विचारधारा का विरोध करने के चलते मारा गया. गौरी की हत्या किसने की ? कौन सी विचारधारा देश में बुद्धिजीवियों की हत्याएं करवा रही है, आज इन्हीं सवालों पर होगी महाबहस.
 
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में देश में रोज़ 88 हत्याएं हुईं. कर्नाटक में हत्याओं का औसत रोज़ाना 4 से ज्यादा था. आमतौर पर हत्या जैसी जघन्य घटनाओं को कानून-व्यवस्था का मामला माना जाता है, लेकिन कुछ कत्ल ऐसे भी होते हैं, जो राजनीति का मुद्दा बन जाते हैं. बैंगलुरू में पत्रकार और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या भी अब बड़ा मुद्दा बन चुकी है.
 
कन्नड़ भाषा की साप्ताहिक मैगजीन गौरी लंकेश पत्रिके की संपादक गौरी की मंगलवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई. गौरी को बाइक सवार अपराधियों ने उनके घर के ठीक बाहर गोलियों से छलनी कर दिया. गौरी लंकेश कट्टर हिंदूवादी संगठनों के खिलाफ लगातार आवाज़ उठा रही थीं. उन पर नक्सलियों का समर्थक होने का आरोप भी लगता रहा और इसी के चलते उनका 12 साल पहले अपने सगे भाई इंद्रजीत के साथ विवाद भी हुआ था.
 
गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ बैंगलुरू से लेकर दिल्ली तक पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. हालांकि अब तक ये साफ नहीं है कि गौरी लंकेश को किसने मारा. हत्या के तरीके से लग रहा है कि गौरी लंकेश को गोली मारने वाले पेशेवर हत्यारे थे. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने गौरी लंकेश की हत्या की जांच SIT से कराने का आदेश दिया है.
 
हत्या का मकसद और हत्यारों का सुराग मिलने से पहले ही कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने दक्षिणपंथी संगठनों पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है. गौरी लंकेश की हत्या को भी एमएम कलबुर्गी, गोविंद पंसारे और नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. इन हत्याओं के पीछे कट्टर हिंदूवादी संगठनों का हाथ होने का शक है.
 
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