नई दिल्ली. मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक और चार शादियों  के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनवाई चल रही है. 6 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई है, इससे पहले शुक्रवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कोर्ट में हलफनामा देकर अपना पक्ष रखा.
 
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बोर्ड ने कहा है कि पर्सनल लॉ कोई कानून नहीं है जिसमें बदलाव किया जा सके, बल्कि ये कुरान में कही गई बातें हैं, जिनका अक्षरश: पालन किया जाना चाहिए. बोर्ड की इस दलील से ये उम्मीद करीब करीब खत्म हो गई है कि इस मसले पर कोई आपसी सहमति बन पाएगी.
 
अब सवाल ये उठता है कि आखिर बोर्ड तीन तलाक को लेकर इतना अड़ियल रुख क्यों अपनाए हुए है? मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मुस्लिम महिलाओं के हक के खिलाफ क्यों है ? आज सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में बोर्ड ने तीन तलाक और चार शादियों के पक्ष में जो दलीलें दी है, वो भी कई सवाल खड़े करती हैं. इंडिया न्यूज के खास शो बड़ी बहस में इन्हीं सवालों पर पेश है चर्चा. 
 
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