Maihar shop allotment scam: मैहर में मां शारदा की नगरी मैहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र घंटाघर चौक स्थित शारदा प्रबंधन समिति की एक बेशकीमती दुकान के आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. मामला उजागर होते ही प्रशासन सक्रिय हो गया है. कलेक्टर विदिशा मुखर्जी ने पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं.
गोपनीय तरीके से हुई नीलामी पर सवाल
घंटाघर चौक स्थित शारदा प्रबंधन समिति भवन की दुकान क्रमांक-04, जो पहले खादी ग्रामोद्योग के पास थी, खाली होने के बाद लगभग एक वर्ष पूर्व नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित की गई थी. आरोप है कि यह नीलामी पूरी तरह गोपनीय तरीके से संपन्न कराई गई. न तो स्थानीय व्यापारियों को इसकी जानकारी दी गई और न ही आम जनता को. नियमों के अनुसार, ऐसी नीलामी का व्यापक प्रचार-प्रसार और समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया जाना आवश्यक होता है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया को जानबूझकर सीमित रखा गया.
बाजार मूल्य से बेहद कम दर पर आवंटन
शिकायत और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करोड़ों की संभावित कीमत वाली इस दुकान को मात्र 10 लाख रुपये की पगड़ी और 7,000 रुपये मासिक किराए पर आवंटित किया गया. जबकि इसी क्षेत्र में समान दुकानों की पगड़ी 35 से 40 लाख रुपये तक और मासिक किराया 20 से 30 हजार रुपये तक बताया जाता है. इस भारी अंतर ने नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सेटिंग’ के आरोप, सीमित प्रतिस्पर्धा
आरोप है कि नीलामी में केवल एक ही परिवार और उनसे जुड़े लोगों ने भाग लिया. इससे प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई और पूरी प्रक्रिया पर पक्षपात के आरोप लगने लगे. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समिति के कुछ कर्मचारियों और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर अपने चहेते व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया. इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब आवंटित दुकान में निर्माण कार्य शुरू कराया गया. इसके बाद स्थानीय निवासी राजू रावत ने जनसुनवाई में कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की.
जर्जर भवन में आवंटन पर भी उठे सवाल
गौरतलब है कि इसी भवन को पूर्व में एसडीएम द्वारा जर्जर घोषित किया जा चुका था. यहां नया कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना भी प्रस्तावित थी. ऐसे में जर्जर भवन की दुकान का आवंटन प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर अतिरिक्त सवाल खड़े करता है. सूत्रों का दावा है कि समिति की अन्य दुकानों में भी कब्जे और किराया वसूली को लेकर अनियमितताओं की जांच की आवश्यकता है. कलेक्टर के निर्देश के बाद अब संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दुकान का आवंटन निरस्त किया जा सकता है और नई, पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया कराई जा सकती है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में किन-किन जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आती है और क्या करोड़ों की इस सार्वजनिक संपत्ति को कथित अनियमितताओं से मुक्त कराया जा सकेगा.
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