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कोर्ट का आदेश ठुकराकर वर्दी में पहुंचे SHO साहब, जज ने दे डाली ऐसी सजा कि जिंदगी भर रखेंगे याद! जानिए क्या है मामला

Gwalior Court: ग्वालियर कोर्ट में बिना वर्दी पेश होने का आदेश ठुकराकर खाकी में पहुंचे SHO को जज की फटकार पड़ी भारी. गायब कट्टे के केस में मिली ऐसी सजा कि भूल नहीं पाएंगे.

By: Shivani Singh | Published: August 6, 2026 7:20:20 PM IST



ग्वालियर कोर्ट में बुधवार को एक गजब ही वाकया देखने को मिला. हुआ यूं कि कोर्ट के साफ-साफ मना करने के बावजूद विश्वविद्यालय थाने के थाना प्रभारी (SHO) रवींद्र कुमार खाकी वर्दी पहनकर पेशी पर पहुंच गए. फिर क्या था, जज साहब ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें जमकर फटकार लगाई और तुरंत सादे कपड़ों में वापस आने का फरमान सुना दिया. जब SHO साहब कपड़े बदलकर वापस लौटे, तो उन्हें देर शाम तक कोर्ट के कटघरे में खड़े रहना पड़ा. पूरा मामला क्या है, आइए समझते हैं:

साफ मनाही के बावजूद वर्दी में पहुंचे SHO

मामला स्पेशल जज सुनील डंडौतिया की अदालत का है. कोर्ट ने एक मामले के सिलसिले में थाना प्रभारी रवींद्र कुमार को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का समन भेजा था. आदेश में साफ लिखा था कि उन्हें बिना वर्दी (सादे कपड़ों में) ही कोर्ट में पेश होना है. इसके बावजूद बुधवार को SHO साहब अपनी रोबीली वर्दी चमकाते हुए अदालत पहुंच गए. कोर्ट ने इसे अपने आदेश की अवहेलना माना और कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें वापस जाकर सादे कपड़े पहनकर आने को कहा.

जज साहब का तीखा सवाल

SHO के इस रवैये पर कोर्ट ने काफी सख्त टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान जज साहब ने सीधे पूछा— “अगर आपको इसी वक्त जेल भेज दिया जाए, तो क्या आप वर्दी पहनकर ही जेल जाएंगे?” कोर्ट का रुख साफ था कि जब लिखित आदेश दिए गए थे, तो उनका पालन क्यों नहीं किया गया.

शाम तक कटघरे में रहे खड़े

कोर्ट की फटकार के बाद SHO साहब सादे कपड़ों में वापस लौटे. इसके बाद अदालत ने उन्हें देर शाम तक गवाहों वाले कटघरे में ही खड़े रहने का निर्देश दिया. पूरी सुनवाई के दौरान वे वहीं खड़े रहे और बार-बार अपनी सफाई व दलीलें देते नजर आए.

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

यह पूरा बखेड़ा कट्टे (देसी तमंचे) की जब्ती से जुड़े एक केस को लेकर शुरू हुआ था. कोर्ट ने केस से जुड़ा जब्त किया गया कट्टा पेश करने का आदेश दिया था, जिसे पुलिस कोर्ट में नहीं ला सकी.

इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने SSP धर्मवीर सिंह को पत्र लिखकर SHO की व्यक्तिगत पेशी तय करने को कहा. कोर्ट ने यहां तक कह दिया था कि अफसर की गैरहाजिरी यह दर्शाएगी कि या तो उन्हें बचाया जा रहा है, या फिर बड़े अधिकारियों का अपने मातहतों पर कोई नियंत्रण नहीं है.

जब SHO से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने लिखित में दिया कि यह सामान मालखाने में मिल ही नहीं रहा है. उन्होंने यह तर्क भी दिया कि जब उन्होंने थाने का चार्ज लिया था, तब यह माल उन्हें सौंपा ही नहीं गया था.

सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी ने हाथ जोड़कर माफी मांगी. उन्होंने सारा ठीकरा एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) पुलिसकर्मी पर फोड़ते हुए कहा कि गलती उनसे हुई थी. हालांकि, कोर्ट ने इस सफाई को सिरे से खारिज कर दिया.

कोर्ट की सख्त टिप्पणी और FIR का आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया, इतने गंभीर मामले में जहां जब्त किया गया सामान ही गायब हो जाए न तो कोई विस्तृत जांच की गई और न ही किसी जिम्मेदार पर गाज गिरी, यह बेहद हैरान करने वाला है.’

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मालखाने से जब्ती का सामान गायब होना कोई मामूली बात नहीं है. अदालत ने निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए.

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