Firoza khatun Dharmendra Singh Love Story: मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक अच्छी और इंसानियत की मिसाल पेश करने वाली खबर सामने आई है. सतना में तैनात उपजेलर (Deputy Jailer) ने कैदी से शादी रचाकर समाज को नया संदेश दिया है. इसमें एक और सकारात्मक बात यह है कि उन्होंने हिंदू पुरुष से शादी की है. ऐसे करने वाली महिला उपजेलर का नाम फिरोजा खातून है और उन्होंने कैदी (सजा पूरी कर चुके) धर्मेंद्र से शादी की है. बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून के परिजन तैयार नहीं थे, लेकिन बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पूरी जिम्मेदारी निभाई. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ही हिंदू रीति-रिवाज से शादी करवाई और फिर कन्यादान भी किया.
कैसे शुरू हुई लव स्टोरी
केंद्रीय जेल सतना में तैनात सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून और पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह की लव स्टोरी में उतने ही ट्विस्ट और टर्न हैं, जितने हिंदी फिल्मों में होते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिरोजा खातून की धर्मेंद्र से मुलाकात जेल के अंदर हुई. फिरोजा उस दौरान जेल में वारंट शाखा का जिम्मा संभाल रही थीं. वहीं, धर्मेंद्र हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. जेल में सजा काटने के दौरान धर्मेंद्र वारंट संबंधी कार्यों में फिरोजा खातून की मदद करता था. इस दौरान मुलाकात होती रहीं. इस बीच फिरोजा खातून को धर्मेंद्र का स्वभाव बहुत ही अच्छा लगा. कुछ समय बाद दोनों को ही प्यार हो गया.
धर्मेंद्र हो गए 4 साल पहले जेल से रिहा
हत्या के आरोप में सजा काट रहे कैदी धर्मेंद्र को अच्छे चाल चलन की वजह से वर्ष 2022 में ही जेल से रिहा कर दिया गया था. अच्छी बात यह रही है कि जेल से बाहर आने के बाद भी फिरोजा और धर्मेंद्र का संपर्क नहीं टूटा. बताया जाता है कि फिरोजा खातून और धर्मेंद्र मोबाइल फोन पर घंटों करते थे. इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया. अच्छी बात यह रही कि धर्मेंद्र सिंह ने वर्ष 2007 से हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटी. इसके बाद जेल में अच्छे आचरण के कारण जेल से रिहा कर दिए गए.
5 मई को हुई धर्मेंद्र-फिरोजा की हुई शादी
5 मई को छतरपुर के लवकुशनगर में फिरोजा और धर्मेंद्र सिंह ने हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए. फिरोजा खातून का परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं था. इस पर शादी कराने की जिम्मेदारी बजरंग दल ने उठाई.यहां तक कि उन्होंने कन्यादान तक किया.
कौन हैं धर्मेंद्र सिंह
धर्मेंद्र सिंह ने विवाद में वर्ष 2007 में चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की पहले हत्या की और फिर इसके बाद शव को जमीन में दफना दिया. करीब 14 साल जेल में बिताने के दौरान धर्मेंद्र का स्वभाव अच्छा पाया गया. इस पर जेल प्रशासन ने उसके अच्छे आचरण को देखते वर्ष 2022 में रिहा कर दिया.