भोपाल. पिछले 13 साल से मध्य प्रदेश में सत्ता संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी बहुमत से दूर रही. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस बसपा के समर्थन से सरकार बनाने की ओर अग्रसर है. अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को भोपाल में संवाददाताओं को संबोधित किया. अपने संबोधन में शिवराज ने कहा कि हमारी अब विपक्ष की भूमिका है, जिसे हम सशक्त और रचनात्मक रूप से निभाएंगे. चौहान ने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे पास 109 विधायक है. हम कमजोर विपक्ष नहीं है. नई सरकार बनाने वाली पार्टी अपने वचनपत्र के मुताबिक 10 दिनों में किसान भाइयों का कर्ज माफ करे। उन्होंने वादा किया है कि ऐसा न करने पर वे अपना मुख्यमंत्री बदल देंगे.

प्रेस कॉफ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने अपनी गलतियों के लिए क्षमा भी मांगा. अपने संबोधन में बोलने के साथ-साथ चौहान ने ट्विटर पर भी लिखा कि यदि मेरे मुख्यमंत्री रहने के दौरान मेरे काम, मेरे शब्दों या मेरे भाव से अंजाने में प्रदेशवासियों के मन को कष्ट हुआ हो तो मैं हृदय से क्षमाप्रार्थी हूं। चुनाव में मिली हार के बाद अपनी भूमिका को तय करते हुए चौहान ने कहा कि अब हम प्रदेश के चौकीदार की तरह निगरानी रखेंगे.

गौरतलब हो कि 28 दिसंबर को राज्य के 230 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव का परिणाम 11 दिसंबर को आया. पिछले 15 साल से एमपी की सत्ता से दूर रही कांग्रेस 114 सीटों पर कब्जा जमाते हुए सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी. बहुमत से मात्र दो सीट पीछे रहने के बाद भी कांग्रेस बसपा के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है. अपने प्रेस कॉफ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वादे को याद दिलाते हुए मांग की कि नई सरकार 10 दिनों में किसान का कर्ज माफ करें. बता दें कि एमपी चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी 10 दिनों के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था.  

 

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