भोपालः मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान ईवीएम से जुड़ी प्रक्रिया में दो बड़ी गलतियां होने की बात को स्वीकार किया है. जिसके बाद सफाई में चुनाव आयोग का कहना है कि ये गड़बड़ी सिर्फ प्रक्रिया स्तर पर हुई है जिसके चलते ईवीएम मशीनों से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है. लेकिन इन दोनों गलतियों नें सबसे ज्यादा विवाद का विषय बना बिना नंबर प्लेट लगे वाहन में ईवीएम मशीन को ले जाना. सागर जिले में वोटिंग के 48 घंटे बाद ईवीएम मशीनों को लेकर एक बिना नंबर की बस जिला कलेक्टर के ऑफिस पहुंची थी.

कांग्रेस ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान के तुरंत बाद इन मशीनों को कलेक्टर के ऑफिस पहुंचाना था लेकिन उसके दो घंटे बाद ऐसा किया गया बिल्कुल यही वाकया खुरई सीट पर हुआ था जहां भोपाल के गृह मंत्री खुद मैदान में हैं. जबकि चुनाव आयोग का कहा है कि ये मशीने सिर्फ बैकअप के तौर पर रखी गई थीं. चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक खुरई में ईवीएम देर से जमा कराने के मामले में एक व्यक्ति को सस्पेंड कर दिया गया है.

पूरे मामले पर चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम मशीनों में किसी तरह की टैंपरिंग नहीं हुई. खुरई सीट पर ईवीएम मशीने देर से जमा कराने के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारी नायब तहसीलदार राजेश मेहरा को सस्पेंड किया गया है. इसके साथ ही शाजापुर में चार अधिकारियों के पास होटल में ईवीएम मिलने की घटना को भी चुनाव आयोग ने सही नहीं माना.

मामले पर सफाई देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि जो ईवीएम मशीने चुनाव में इस्तेमाल नहीं होनी थी उनको अलग रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए थी. इसके अलावा खुरी सीट पर हुई घटना में ईवीएम मशीनों को मतदान के अगले ही दिन इकट्ठा करके जमा करानी चाहिए थी लेकिन 48 घंटे से ज्यादा के वक्त के बाद ये मशीनें जमा कराई गईं थी. जिसके बाद कांग्रेस ने इस पूरे मामले में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था.

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