नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में 24 घंटे लंबी मतगणना के बाद आखिरी नतीजे आए तो ये साफ हो गया कि बीजेपी की सरकार हार चुकी है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास इस्तीफा देने के सिवा कोई विकल्प नहीं है. 109 सीट जीत पाई बीजेपी के पास बहुमत के लिए जोड़-तोड़ की भी जगह नहीं बची थी क्योंकि कांग्रेस ने 114 सीट जीत लिए थे. 230 सीटों वाली एमपी विधानसभा में 223 सीट बीजेपी और कांग्रेस के पास चले गए. बच गए 7 में बीएसपी के 2, एसपी के 1 और 4 निर्दलीय थे. एसपी कांग्रेस के साथ हो चुकी थी. बीएसपी चीफ मायावती भी बीजेपी के साथ जाने वाली थी नहीं. बचे 4 निर्दलीय अगर बीजेपी पटा भी लेती तो भी वो 113 पर लटक जाती. वहीं कांग्रेस को बस 2 विधायकों के समर्थन से बहुमत मिल जाएगा. मध्य प्रदेश में सरकार भले कांग्रेस बना रही हो लेकिन अगले पांच साल राजनीति का असली मजा बीएसपी, एसपी और निर्दलीय विधायक लेंगे जिनमें ज्यादातर मंत्री पद के दावेदार बन गए हैं.

खैर, बात बीजेपी की हार की और कांग्रेस की अटकते-लटकते जीत की. सबसे पहली मजेदार चीज ये हुई कि वोट बीजेपी को कांग्रेस से ज्यादा मिले पर सीट कांग्रेस को ज्यादा. 230 सीटों पर बीजेपी को कुल 1,56,42,980 वोट मिले जिससे 47827 वोट कांग्रेस को कम मिले. कांग्रेस ने 1,55,95,153 वोटों के साथ ही बीजेपी के 109 के मुकाबले 114 सीटों जीत ली. वोट प्रतिशत बीजेपी का 41 परसेंट रहा जबकि कांग्रेस का 40.9 परसेंट. राज्य में नोटा को मिला वोट कांग्रेस और बीजेपी के कुल वोट अंतर से दस गुना से भी ज्यादा रहा. नोटा को राज्य में 5,42,295 वोट मिले, तकरीब 1.4 परसेंट. कम वोट पर भी ज्यादा सीट निकालने का तो सीधा कारण ये है कि कुछ सीट पर बीजेपी बड़े मार्जिन से जीती होगी लेकिन कांग्रेस कुछ सीटें छोटे मार्जिन से जीती होगी.

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दूसरी मजेदार चीज ये दिखी कि 2013 के विधानसभा चुनाव के 44.88 परसेंट वोट शेयर के मुकाबले बीजेपी का वोट प्रतिशत करीब 4 परसेंट ही गिरा पर सीट 165 से 109 हो गई. वहीं कांग्रेस को 2013 के 36.38 परसेंट से करीब 4 परसेंट का फायदा हुआ और वो 58 से 114 पर पहुंच गई. नुकसान हो गया बहनजी का. मायावती की बीएसपी 2013 में 6.29 परसेंट वोट के साथ 4 सीट जीती थी. इस बार बसपा 5 परसेंट वोट पर गिरी और सीट भी 4 से 2 हो गए. कुछ सीटों पर बीएसपी नंबर 2 पर रही और कांग्रेस या बीजेपी से ऊपर रही. एसपी ने 2013 के वोट शेयर 1.2 परसेंट को 1.3 परसेंट किया और जीजीपी से एलायंस में 1 सीट निकल गई जबकि खुद जीजीपी एक सीट जीतते-जीतते हार गई. जिस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन करके अखिलेश यादव की सपा ने एक सीट जीत ली वो जीजीपी खुद एक सीट निकाल नहीं पाई. जीजीपी को 1.8 परसेंट तो सपा को 1.3 परसेंट वोट मिले. निर्दलीय कैंडिडेट्स को 5.8 परसेंट वोट मिले और सीट 4.

तीसरी मजेदार चीज ये दिखी कि 230 में 10 ऐसी सीटें रहीं जहां हार जीत का फैसला 1000 वोट से कम से हुआ और इन सारी दस सीटों पर नोट का वोट विजेता और दूसरे नंबर के प्रत्याशी से ज्यादा रहा. 2 सीट तो 500 के अंतर से क्लीयर हुईं. ऐसी ही दस सीटों का हाल आगे. और ऐसे नहीं है कि ये सारी 10 सीटें कांग्रेस ने जीती. 10 में 7 सीट कांग्रेस ने जीती है तो 3 सीट बीजेपी ने भी 1000 के कम मार्जिन से जीती है.

1. ग्वालियर दक्षिण- सबसे कम मार्जिन से निकली सीट- ग्वालियर साउथ सीट पर हार-जीत का अंतर 121 वोट

मध्य प्रदेश चुनाव में सबसे दर्दनाक हार मिली ग्वालियर साउथ सीट पर बीजेपी के नारायण सिंह कुशवाहा को जिन्हें मात्र 121 वोट से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने हराया. प्रवीण पाठक को 56339 तो नारायण कुशवाहा को 56248 वोट मिले. इस सीट पर नोटा 1550 रहे. कुशवाहा की हार की सबसे बड़ी वजह बनीं बीजेपी की बागी पूर्व मेयर समीक्षा गुप्ता जिनको 30745 वोट मिल गए.

2. सुवासरा- कांग्रेस का बागी तीसरे नंबर पर रहा पर फिर भी कांग्रेस से सुवासरा सीट 350 वोट से हार गई बीजेपी

मध्य प्रदेश चुनाव में बीजेपी के हाथ से निकली सुवासरा सीट पर बीजेपी कैंडिडेट राधेश्याम नानालाल पाटीदार को हार से ज्यादा इस बात का मलाल रहेगा कि कांग्रेस के बागी कैंडिडेट ओम सिंह भाटी को 10 हजार से ज्यादा वोट मिलने के बाद भी वो कांग्रेस के हरदीप सिंह डांग से 350 वोट से हार गए. कांग्रेस के हरदीप सिंह डांग को 93169 वोट मिले जबकि बीजेपी के राधेश्याम पाटीदार को 92819 वोट. हार का अंतर 350 और नोट को मिले वोट 2967.

3. जावरा- बीजेपी के बागी ने ज्यादा वोट काटे फिर भी 511 वोट से जावरा सीट हार गई कांग्रेस

मध्य प्रदेश चुनाव में जावरा पर अजब ही खेल हुआ. बीजेपी और कांग्रेस दोनों के कैंडिडेट के खिलाफ उनके ही बागी नेता खड़े हो गए और दोनों ने वोट भी खूब बटोरा लेकिन बीजेपी के बागी ने ज्यादा वोट काटा फिर भी कांग्रेस का कैंडिडेट 511 वोट के अंतर से हार गया. बीजेपी के राजेंद्र पांडे उर्फ राजू भैया ने 64503 वोट के साथ कांग्रेस के केके सिंह कालुखेड़ा को 511 वोट के अंतर से हराया जिनको 63992 वोट मिले. नोटा रहा 1510. बीजेपी के बागी श्याम बिहारी पटेल को 23672 वोट मिले जबकि कांग्रेस के बागी हमीर सिंह राठौर को 16593 वोट मिले.

4. जबलपुर उत्तर- बीजेपी के बागी ने 29 हजार वोट काटे फिर भी मात्र 578 वोट से जबलपुर नॉर्थ जीती कांग्रेस

जबलपुर नॉर्थ सीट पर कांग्रेस के विनय सक्सेना ने 50045 वोट लाकर बीजेपी के शरद जैन को 578 वोट से हराया जिनको 49467 वोट मिला. बीजेपी के बागी धीरज पटेरिया के 29479 वोट लाने के बाद भी कांग्रेस की जीत का मार्जिन 578 वोट रहा. इस सीट पर नोटा का बटन 1209 लोगों ने दबाया, हार के अंतर के दोगुने से ज्यादा.

5. बीना- बीजेपी बीना में जीती पर कांग्रेस से जीत का मार्जिन 632 रहा

बीना सीट पर बीजेपी के महेश राय ने कांग्रेस के शशि कठोरिया को 632 वोटों के अंतर से हराया. भाजपा के महेश राय को 57828 वोट मिले जबकि कांग्रेस के शशि कठोरिया को 57196 वोट मिले. इस सीट पर नोटा 1528 रहा.

6. कोलारस- बीजेपी जीती कोलारस, कांग्रेस से जीत का अंतर 720

जावरा और बीना के बाद कोलारस वो तीसरी सीट है जहां बीजेपी 1000 वोट के कम मार्जिन से जीती है. कोलारस में बीजेपी के बीरेंद्र रघुवंशी को 72450 वोट मिले तो कांग्रेस के महेंद्र रामसिंह यादव को 71730 वोट. बीरेंद्र रघुवंशी ने महेंद्र यादव को 720 वोटों के अंतर से हराया. नोटा 1674 रहा.

7. राजनगर- कांग्रेस ने 732 वोट के अंतर से बीजेपी को राजनगर में हराया

राजनगर में कांग्रेस के विक्रम सिंह उर्फ नाती राजा ने बीजेपी के अरविंद पटेरिया को 732 वोट के अंतर से हराया. इस सीट पर नोटा के वोट रहे 2485. कांग्रेस के विक्रम सिंह को 40362 वोट मिले जबकि बीजेपी के अरविंद पटेरिया को 39630 वोट.

8. दमोह- 798 वोट से दमोह सीट हारे वित्त मंत्री जयंत मलैया, 28 साल बाद कांग्रेस ने छीनी सीट

मध्य प्रदेश का सबसे वीआईपी मंत्री वित्त मंत्री जयंत मलैया भी 1000 वोट से कम की हार में फंस गए. कांग्रेस के राहुल सिंह ने जयंत मलैया को 798 वोट के अंतर से हरा दिया. जयंत मलैया की दमोह सीट पर बीजेपी 28 साल से लगातार जीत रही थी. राहुल सिंह को 78997 वोट मिले जबकि जयंत मलैया को 78199 वोट. इस सीट पर नोटा 1299 रहा.

9. ब्यावरा- 826 वोट के अंतर से ब्यावरा सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी को हराया

ब्यावरा सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी को 826 वोट के मार्जिन से हराया. इस सीट पर नोटा को 1482 वोट मिले हैं. कांग्रेस के गोवर्धन डांगी को 75569 वोट मिले जबकि बीजेपी के नारायण सिंह पवार को 74743 वोट मिले.

10. राजपुर- कांग्रेस के बाला बच्चन 932 वोट के अंतर से बीजेपी के अंतर सिंह से जीते राजपुर

राजपुर वो दसवीं और आखिरी सीट है जो 1000 वोट से कम के अंतर से निकली. इस सीट पर 932 वोट के अंतर से कांग्रेस के बाला बच्चन ने बीजेपी के अंतर सिंह देवी सिंह पटेल को हराया. बाला बच्चन को 85513 वोट मिले जबकि अंतर सिंह को 84581 वोट. इस सीट पर नोटा को 3358 वोट मिला.

और आखिरी में राज्य की चर्चित महिला मंत्री अर्चना चिटनीस की बुरहानपुर सीट जो जो 1000 वोट के अंतर से तो नहीं निपटी लेकिन नोटा मिले वोट बीजेपी कैंडिडेट को मिल गए होते तो वो जीत जातीं. बुरहानपुर पर कांग्रेस के बागी ठाकुर सुरेंद्र सिंह नवल सिंह उर्फ शेरा भैया ने शिवराज सिंह सरकार की मंत्री अर्चना चिटनीस को 5120 वोट से हरा दिया. इस सीट पर नोटा को वोट मिले 5726. ठाकुर सुरेंद्र सिंह को 98561 वोट मिले जबकि अर्जना चिटनीस 93441 मिले. कांग्रेस कैंडिडेट रवींद्र महाजन को मात्र 15369 वोट मिले.

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