नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में आपको बाजारों या सड़क किनारे गन्ने का जूस बेचने वाले दिख जाते हैं. महज 10 या 20 रूपए में गन्ने के जूस का एक गिलास आपकी प्यास तो बुझा देता है लेकिन इससे होने वाले खतरे से आप अभी तक अंजान हैं. ऐसे में आपकी जरा-सी सावधानी आपको कई बिमारियों से बचा सकती है. इसलिए कहीं भी खड़े होकर गन्ने का रस पीने से पहले आज जानिए कि वह बनता कैसे है.

दरअसल गन्ने का रस और बर्फ दोनों के प्रभाव अलग होते हैं. वहीं कई बार गन्ने की भी सफाई नहीं की जाती. सफाई न करने की वजह से गन्ने पर काली फफूंद लग जाती है. वहीं हो सकता है जिस गन्ने का जूस आप पी रहे हैं उस पर से खेतों की मिट्टी न हटाई गई हो. वहीं हो सकता है जूस में इस्तेमाल किया गया नींबु धब्बेदार हो या फिर उसके बीज भी नहीं निकाले गए हो. यहीं नहीं इसके अलावा जूस ऑर्डर करने से पहले आपने यह जानने की कोशिश की उसे बनाने वाले के हाथ साफ हैं या नहीं. बस यहीं कुछ छोटी-छोटी कमियां आपको बीमार बनाने के लिए काफी हैं.

इस मामले में बॉटनी एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप गलती से फंगस लगे हुए गन्ने का रस पी लेते हैं तो हेपेटाइटिस ए, डायरिया और पेट की बीमारियां होने की संभावनाएं अधिक हो जाती हैं. ऐसे ही गन्ने की मिट्टी से भी पेट की बीमारियां जन्म लेती हैं. वहीं एक जनरल फिजिशियन का इस बारे में कहना है कि रस बनाते समय सफाई का ध्यान न रखा जाए तो उसके प्रभाव से ज्वाइंडिस, हेपेटाइटिस, टायफायड, डायरिया जैसी बीमारियां आपको घेर सकती हैं.

वहीं गन्ने का रस निकालते समय जिन मशीनो का इस्तेमाल होता है उसकी सफाई भी एक अहम मुद्दा है. आपको शायद नहीं मालूम कि मशीनों को चलाने का एक खास किस्म के तेल का उपयोग होता है. अगर गलती से भी यह तेल आपके पेट में चला जाए तो बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है. इसलिए रास्तों में खड़ी किसी रेहड़ी से जूस पीने से बचें अन्यथा साफ-सफाई पर गौर कर लें.

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