नई दिल्ली. आज हमारा देश 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. आज ही के दिन 26 जनवरी 1950 को हमारा देश का संविधान लागू हुआ था और इसके तहत भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना. ऐसे में आज 26 जनवरी के इस खास मौके पर हम आपको गणतंत्र दिवस से जुड़ी एक अनोखी दास्तां से रूबरू करायेंगे. यह दास्तां देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी है कि जब वह अपनी बड़ी बहन की मृत्यु होने जाने के बाद उनका शव घर में छोड़कर गणतंत्र दिवस समारोह स्थल पर सलामी लेने पहुंच गए थे.

गौरतलब है कि 26 जनवरी 1960 में 10वें गणतंत्र दिवस से एक दिन 25 जनवरी को देश के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की बड़ी बहन भगवती देवी का देहांत हो गया था. राजेंद्र प्रसाद अपनी बहन को मां का दर्जा देते थे ऐसे में बहन की मृत्यु से उनको काफी सदमा पहुंचा और वह बहुत दुखी थे. दुखों के इतने बड़े संकट के बावजूद भी बहन के मृत शव को घर में छोड़कर देश के राष्ट्रपति होने का फर्ज अदा करते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में सलामी लेने पहुंच गये. इसके बाद जब गणतंत्र दिवस समारोह समाप्त हो गया तब डॉ राजेंद्र प्रसाद अपने घर वापस आये और अपनी बड़ी बहन के मृत शव का अंतिम संस्कार किया.

डॉ राजेंद्र प्रसाद हमारे देश के महान नेताओं में से एक हैं. देश के प्रति राजेंद्र प्रसाद के कर्तव्य को आज भी याद किया जाता है. साथ इसे एक मिसाल के तौर पर देखा जाता है. आज हमारे देश में 70वां गणतंत्र दिवस मानाया जा रहा है, लेकिन इन 70 सालों में आज भी डॉ राजेंद्र प्रसाद के इस जज्बे को सलाम किया जाता है. 

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