नई दिल्ली. हिंदू धर्म में वैदिक परंपरा के अनुसार अनेक रीति-रिवाज़, व्रत-त्यौहार व परंपराएं होती हैं. हिंदूओं में जातक के गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक अनेक प्रकार के संस्कार किये जाते हैं. लेकिन अंत्येष्टि के पश्चात भी कुछ ऐसे कर्म होते हैं जिन्हें मृतक के संबंधी विशेषकर संतान को करना होता है. वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या को श्राद्ध काम किया जा सकता है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है.

इसलिये अपने पूर्वज़ों को के प्रति श्रद्धा प्रकट करने को श्राद्ध कहते हैं. हिंदूओं के पौराणिक ग्रंथों में इसका वर्णन हैं इसमें कहा गया है कि देवपूजा से पहले अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिये. पितरों के प्रसन्न होने पर भगवान भी खुश होते हैं.यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजूर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किये जाते हैं. इस पिछ कई बाते कही गई है कहा जाता है कि अगर पितरों का श्राद्ध न करने से उन्हें मुक्ति नहीं मिलती है. उनकी आत्मा मृत्यू लोक में भटकते रहती है.

इस साल यानी की 2019 का पितृ पक्ष दिनों के लिए होंगे. इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर को खत्म होंगे. बता दें पितृ पक्ष में नए कपड़ों व आयोजनों की मनाही होती हैं. हिंदू धर्म में इन 15 दिन किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते. पितृ पक्ष दिनों में लोग अपने मरे हुए परिवार के लोगों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन पूजा करते हैं.

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