नई दिल्ली: हर साल मार्च महीने में आने वाले महिला दिवस पर आपने बड़े-बड़े मॉल्स और दुकानों पर महिलाओं के लिए एक से बढ़कर एक डिस्काउंट देखे होंगे. अगर आप महिला हैं तो आपको महिला दिवस की शुभकामनाओं वाले संदेश भी मिलें होंगे या फिर आने किसी को भेजे होंगे. महिला के रूप में हमारी मां, बहन, पत्नी या बेटी की हमारी जिंदगी में क्या अहमियत है ये हम अच्छे से जानते हैं लेकिन एक पिता, पति, भाई या बेटे के तौर पर एक पुरुष के बारे में क्या हम कभी बात करते हैं? क्या हम समझने की कोशिश करते हैं कि एक पुरुष की जिंदगी कैसी होती है? आज यानी 19 नवंबर को अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस है और कमाल की बात ये है कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है.

कारण सिर्फ एक क्योंकि हमने समाज को ऐसा ही बनाया है जहां एक महिला को ज्यादा सुना जाता है. हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां महिलाओं की जीत को ही दुनिया की जीत मान लिया जाता है. महिलाओं की आवाज दुनिया बिजली से तेज गति के साथ पहुंचती है. यही हमारी दुनिया का व्यवहार है और हमने समाज को ऐसा ही बनाया है कि पुरुष महिलाओं की हिफाजत करेगा लेकिन महिलाओं की हिफाजत करना इतना आसान नहीं होता क्योंकि कई बार महिलाओं को ये पता ही नहीं होता कि उन्हें जिंदगी में आखिर किस चीज की जरूरत है, ऐसे में महिलाओं को एक ऐसे सहारे की जरूरत होती है जो उसके साथ खड़े होकर उसे हिम्मत दे सके. जो उसे प्रोत्साहित करे और उसे ये एहसास दिलाए कि वो कितनी जरूरी है.

लेकिन समय के साथ-साथ पुरुष की जिम्मेदारियां बढ़ती जली जाती है और वो जिम्मेदारी उसकी आखिरी सांस तक उसके साथ रहती है. कई बार एक पुरुष अपनों के चेहरे पर खुशी देखने के लिए अपनी इच्छाओं का गला घोंट लेता है. एक महिला की अपेक्षा पुरुष के भीतर ज्यादा तनाव ज्यादा बोझ और ज्यादा जिम्मेदारियां होती है. महिलाएं अक्सर कहती हैं कि वो एक बच्चे को अपने पेट में रखती है या उसे जन्म देते हुए असहनीय दर्द झेलती है लेकिन जो बात आप महसूस नहीं कर पाते वो ये कि अपनों को दर्द में देखना उससे भी ज्यादा दर्दनाक होता है. गर्भावस्था के दौरान 9 महीने का समय पति के लिए भी उतना ही मुश्किल होता है.

आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में 76 फीसदी आत्महत्या करने वाले पुरुष होते हैं. 86 फीसदी बेघर पुरुष होते हैं, 40 फीसदी पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं. दुनिया में होने वाले ज्यादातर अपराधों का शिकार पुरुष होते हैं. महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को 64 फीसदी ज्यादा जेल में रहना पड़ता है यानी उन्हें महिला की अपेक्षा सजा भी ज्यादा मिलती है. शायद ये आंकड़े देखकर आपको अंदाजा लगे कि पुरुष होना इतना भी आसान नहीं होता इसलिए जाइए और आज अपने पिता, पति, भाई या पुरुष दोस्त से गले मिलकर उन्हें बधाई दें और ये एहसास दिलाने की कोशिश करें कि आपकी जिंदगी में उनकी क्या भूमिका है.

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