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Adulterated milk: दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है और यह लगभग हर घर की रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा है. सुबह की चाय से लेकर बच्चों की डाइट और कई तरह के खाद्य पदार्थों तक, दूध का उपयोग हर दिन किया जाता है. लेकिन बढ़ती मांग के बीच बाजार में मिलावटी दूध की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. अधिक मुनाफा कमाने के लिए कई जगहों पर दूध में पानी, डिटर्जेंट, स्टार्च, सिंथेटिक पदार्थ और अन्य केमिकल मिलाए जाते हैं, जिससे इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है.
केवल दूध खरीदना ही पर्याप्त नहीं
ऐसे में केवल दूध खरीदना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि जो दूध आप और आपका परिवार पी रहा है, वह शुद्ध है या नहीं. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू तरीकों की मदद से दूध में मिलावट की पहचान की जा सकती है. आइए जानते हैं मिलावटी दूध के नुकसान और उसकी जांच करने के सरल उपायों के बारे में.
मिलावटी दूध क्यों बन रहा है चिंता का विषय?
दूध में मिलावट केवल गुणवत्ता का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा भी है. कई बार दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें पानी मिलाया जाता है, जबकि कुछ मामलों में डिटर्जेंट, स्टार्च और सिंथेटिक पदार्थों का इस्तेमाल भी किया जाता है. ऐसे तत्व शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं और लंबे समय तक इनके सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए दूध की शुद्धता की जांच करना बेहद जरूरी माना जाता है.
मिलावटी दूध पीने से हो सकते हैं ये नुकसान
मिलावटी दूध का सेवन करने से पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं. दूध में मौजूद अशुद्धियां और रासायनिक पदार्थ पेट दर्द, दस्त, उल्टी और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. इसके अलावा कुछ लोगों में अपच, गैस और अन्य पाचन संबंधी दिक्कतें भी देखने को मिल सकती हैं. यही वजह है कि दूध की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना जरूरी है.
बूंद टेस्ट से करें दूध की जांच
दूध की शुद्धता पहचानने का एक आसान तरीका बूंद परीक्षण माना जाता है. इसके लिए किसी साफ और चिकनी सतह पर दूध की एक या दो बूंद डालें. अगर दूध धीरे-धीरे नीचे की ओर बहता है और पीछे सफेद रंग का निशान छोड़ता है तो इसे अपेक्षाकृत शुद्ध माना जा सकता है. वहीं अत्यधिक पानी मिला होने पर दूध तेजी से बह सकता है और सफेद निशान कम दिखाई देता है.
झाग देखकर पहचानें डिटर्जेंट की मिलावट
दूध में डिटर्जेंट मिलावट की पहचान झाग के जरिए भी की जा सकती है. दूध को किसी बर्तन में डालकर अच्छी तरह हिलाएं. यदि हिलाने के बाद दूध में मोटे और लंबे समय तक बने रहने वाले झाग दिखाई दें, तो यह डिटर्जेंट की मिलावट का संकेत हो सकता है. सामान्य दूध में झाग जल्दी बैठ जाते हैं, जबकि मिलावटी दूध में वे ज्यादा देर तक बने रह सकते हैं.
मलाई की परत भी बताती है दूध की सच्चाई
शुद्ध दूध को उबालने के बाद उसके ऊपर मलाई की एक प्राकृतिक परत बनने लगती है. यह शुद्धता का एक सामान्य संकेत माना जाता है. अगर दूध में सिंथेटिक पदार्थ मिलाए गए हों तो उसकी मलाई की बनावट और स्वाद दोनों अलग महसूस हो सकते हैं. ऐसे दूध में प्राकृतिक मलाई जैसी गुणवत्ता नहीं दिखाई देती. दूध में स्टार्च की मिलावट की जांच के लिए आयोडीन टेस्ट का उपयोग किया जा सकता है. इसके लिए दूध को ठंडा होने दें और उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालें. अगर दूध का रंग नीला पड़ने लगे तो यह स्टार्च की मिलावट का संकेत हो सकता है. हालांकि इस परीक्षण को सावधानी के साथ करना चाहिए.
स्वाद और खुशबू पर भी दें ध्यान
शुद्ध दूध का स्वाद हल्का मीठा और प्राकृतिक होता है. यदि दूध पीते समय उसका स्वाद असामान्य लगे या उसमें साबुन जैसी गंध महसूस हो, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है. दूध की खुशबू और स्वाद में होने वाला बदलाव कई बार उसके शुद्ध या मिलावटी होने की जानकारी दे सकता है. इसलिए इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. दूध हमेशा विश्वसनीय स्रोत से खरीदना चाहिए. पैकेज्ड दूध लेते समय उसकी एक्सपायरी डेट और पैकिंग की स्थिति जांच लें. खुले दूध की खरीदारी करते समय गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. साथ ही किसी भी तरह की शंका होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग या अधिकृत लैब में दूध की जांच भी करवाई जा सकती है.