नई दिल्ली: अक्सर जब आप सोना खरीदने जाते हैं तो एक ही चीज देखते हैं कि सोने पर हॉलमार्क का निशान है या नहीं क्योंकि सरकार भी कहती है कि हॉलमार्क का सोना सबसे बेहतर और सुरक्षित है. सोनार भी आपको हॉलमार्क का सोना बोलकर ही बेचता है कि ये देखिए इसपर हॉलमार्क का निशान है और ये सर्टिफाइड सोना है. लेकिन क्या हॉलमार्क लगे हुए सोने में वाकई कोई घपला नहीं हो सकता?

अगर आप ऐसा सोचते हैं तो गलत हैं. हॉलमार्क लगा हुआ सोना बेचकर भी सोनार आपको बेवकूफ बना सकता है. वो कैसे? चलिए आपको बताते हैं. दरअसल, सोने का सामान कई टुकड़ों में बनता है और बाद में जोड़ा जाता है. उदाहरण के लिए जैसे चूड़ी को ही ले लीजिए. चूडी आधा-आधा करके बनती है और फिर उसे जोड़ा जाता है. सोनार ये करते हैं कि आधी सोने की चूड़ी को हॉलमार्क के लिए भेज देते हैं जो पूरे सोने की होती है और बाकी बचे हुए आधे हिस्से में मिलावट कर उसमें ब्रॉस या उससे भी कम कीमत वाली कोई धातु मिला देते हैं और फिर दोनों को जोड़ देते हैं.

ऐसे में जब आप सोना लेने जाते हैं तो आपको नजर आता है हॉलमार्क जो आपको चूड़ी पर नजर आता है लेकिन आपको पता ही नहीं चलता कि इसका आधा हिस्सा ही पूरे सोने का यानी 22 कैरेट का है लेकिन आधा सोना 16-18 कैरेट के बीच का होता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी सोनार ऐसा करते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा ही होता है. इसलिए सोना खरीदने से पहले ध्यान रखें कि दोनों तरफ हॉलमार्क का निशान चेक करें.
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