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मोटापे की महामारी से जूझ रहा है का यह द्वीप! 77 फीसदी आबादी ओबेसिटी की शिकार, वजह जानकर चौंक जाएंगे

American Samoa: प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकन समोआ दुनिया के सबसे अधिक मोटापे से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है. वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार यहां 77 प्रतिशत वयस्क आबादी मोटापे का शिकार है. विशेषज्ञ इसके पीछे जंक फूड की बढ़ती खपत, बदलती जीवनशैली और पारंपरिक भोजन से दूरी को मुख्य कारण मानते हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: May 31, 2026 6:35:47 PM IST



American Samoa: दुनिया भर में ऐसी कई जगहें हैं जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और अनोखी संस्कृति के लिए मशहूर हैं. लेकिन प्रशांत महासागर में स्थित एक इलाका अपनी खूबसूरती से ज्यादा एक अलग वजह से चर्चा में रहता है. यह स्थान है अमेरिकन समोआ, जिसे दुनिया के सबसे अधिक मोटापे से प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां मोटापा सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है.

बड़ी संख्या में लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकन समोआ में बड़ी संख्या में लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं. बदलती खानपान की आदतें, जंक फूड का बढ़ता चलन और पारंपरिक भोजन से दूरी को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है. यही वजह है कि यह छोटा द्वीपीय क्षेत्र अब पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है.
 

77 फीसदी वयस्क आबादी मोटापे से प्रभावित

 
अमेरिका के अधीन आने वाले इस प्रशांत द्वीप क्षेत्र को मोटापे की राजधानी जैसे विशेषणों से भी जोड़ा जाता है. वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 77 प्रतिशत वयस्क आबादी मोटापे की श्रेणी में आती है.
यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि स्थानीय स्तर पर स्वस्थ और फिट व्यक्ति को ढूंढना भी मुश्किल माना जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे की यह दर दुनिया में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है.
 

कभी सबसे स्वस्थ समुदायों में होती थी गिनती

  •  आज भले ही अमेरिकन समोआ मोटापे की समस्या के लिए जाना जाता हो, लेकिन हमेशा से हालात ऐसे नहीं थे. एक समय था जब यहां के लोगों को दुनिया के सबसे स्वस्थ समुदायों में शामिल किया जाता था.
  • स्थानीय लोग पारंपरिक भोजन, ताजे समुद्री खाद्य पदार्थ, फल और प्राकृतिक आहार पर निर्भर रहते थे. इससे उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहता था और मोटापे जैसी समस्याएं बेहद कम देखने को मिलती थीं.
  • विशेषज्ञों के मुताबिक समय के साथ यहां की खाद्य व्यवस्था में बड़े बदलाव आए. खाद्य संकट और आयातित उत्पादों पर बढ़ती निर्भरता के कारण पारंपरिक और पौष्टिक भोजन महंगा होता चला गया.
  • वहीं दूसरी ओर प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और जंक फूड अपेक्षाकृत सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने लगे. धीरे-धीरे लोगों की खानपान की आदतें बदलती गईं और मोटापे के मामले तेजी से बढ़ने लगे.

    मोटापे के साथ बढ़ीं कई गंभीर बीमारियां

    मोटापा अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है और अमेरिकन समोआ इसका बड़ा उदाहरण बन चुका है. यहां मोटापे के कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी बीमारियों के मामले लगातार बढ़े हैं. स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार यहां बड़ी संख्या में लोग टाइप-2 डायबिटीज से भी प्रभावित हैं. मोटापे और मधुमेह का बढ़ता संबंध स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है.
     

    स्वास्थ्य एजेंसियां चला रही हैं जागरूकता अभियान

     
    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को संतुलित आहार अपनाने के लिए जागरूक कर रही हैं. लोगों को अधिक फल, सब्जियां और पौष्टिक भोजन खाने की सलाह दी जा रही है. इसके साथ ही जंक फूड की खपत कम करने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए कई अभियान भी चलाए जा रहे हैं. उद्देश्य यह है कि आने वाले वर्षों में मोटापे की दर को नियंत्रित किया जा सके.
     

    पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है अमेरिकन समोआ

     
    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकन समोआ की कहानी केवल एक द्वीप तक सीमित नहीं है. यह पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि यदि असंतुलित खानपान और जंक फूड पर निर्भरता बढ़ती रही तो मोटापा वैश्विक स्वास्थ्य संकट का और बड़ा रूप ले सकता है. आज दुनिया के कई देश ओबेसिटी की समस्या से जूझ रहे हैं. तेजी से बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और अत्यधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन इस समस्या को और बढ़ा रहा है.
     

    नाउरु और टोंगा भी हैं सूची में शामिल

     
    अमेरिकन समोआ के अलावा प्रशांत महासागर के कई अन्य द्वीपीय देश और क्षेत्र भी मोटापे की ऊंची दरों के लिए जाने जाते हैं. नाउरु और टोंगा जैसे देशों का नाम भी दुनिया के सबसे अधिक मोटापे से प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल किया जाता है. वहीं एशिया में भारत और चीन जैसे देशों में भी मोटापे के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं.
     

    बढ़ती ओबेसिटी पर लगाम लगाना बड़ी चुनौती

     
    विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे की समस्या केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकती है. इसलिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली को अपनाना बेहद जरूरी है. अमेरिकन समोआ का उदाहरण यह बताता है कि यदि खानपान और जीवनशैली पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एक पूरा समाज स्वास्थ्य संकट का सामना कर सकता है.

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