नई दिल्ली. बिहार के साथ-साथ देश के अन्य भागों में भी छठ पर्व रविवार सुबह से ही शुरू हो गया है. यह सूरज भगवान की उपासना का पर्व है. इस पर्व में जो भी सूरज भगवान की उपासना करते है वह 36 घंटे का उपवास रखकर उनकी अराधना करते है एवं गेंहू, दूध, गन्ना, केला और नारियल चढ़ा कर उनकी पूजा करते हैं.
 
चार दिन तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है. अगले दिन खरना, इसके प्रसाद खाने के बाद व्रती दो दिन तक पानी भी नहीं पीती हैं.  खरना के अगले दिन डूबते हुए सूरज को महिलाएं व पुरुष नदी, तालाब के घाट पर पहुंचकर पानी में खड़े होकर अर्घ्य देंगे है और उनकी पूजा करेंगे और चौथे दिन उगते हुए सूरज को अर्घ्य देकर छठ माता की पूजा व आराधना करेंगे और छट पूजा का समापन करेंगे. 48 घंटे तक चलने वाले इस निर्जला व्रत में महिलाएं, पति की दीर्घायु होने की कामना करती हैं. साथ ही अपने बच्चे के सुख शांति के लिए सूर्य भगवान से आराधना करती हैं 
 
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल छठ पूजा के लिए सामानों की खरीद-बिक्री 280 करोड़ रुपए से ज्यादा होगी. बिहार में सबसे ज्यादा पटना के गंगा किनारे छट के लेकर भीड़ रहती है. इसलिए सुरक्षा के ध्यान में रखते हुए सिर्फ पटना में 10 हजार जवान और एक हजार अधिकारियों को तैनात किए गए है. 
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिन गंगा घाटों का दौरा भी किया था. पूरे देशभर में छठ के लिए रेलवे ने 22 स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं. फिर भी ट्रेनों में टिकट कन्फर्म नहीं हो रही है. देश कि राजधानी दिल्ली में यमुना के किनारे और मुंबई के समुद्री तट पर भी छठ पूजा का शानदार आयोजन किया जाता है. इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों में छठ पर्व का आयोजन किया जाता है. देशों के साथ-साथ विदेशों में भी बिहार के लोकपर्व छट पर्व वहां रहने वाले बिहार के लोग धूम-धाम से मनाते है.
 

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