नई दिल्ली.  अक्सर लोगों को नाक की परेशानी का सामना करना पड़ता है जिसमें नाक लंबी या छोटी या यू कहे कि नाक का चेहरे के मुताबिक न दिखना. लेकिन विज्ञान की संभवानाओं भरी इस दुनिया में कुछ नया देखने को मिल रहा है जिसमें ‘राइनोप्लास्टी विधि’ या ‘नोज जॉब’ सबसे अलग है. कॉस्मेटिक सर्जरी की सबसे लोकप्रिय विधि का प्रचलन भारत में बड़े जोरो से चल रहा है. 
 
कैसे होता है ‘नोज जॉब’ में इलाज
 
बता दें कि यदि किसी व्यक्ति का स्वास्थय अच्छा हो, नजरिया सकारात्मक हो और वह वास्तविक उम्मीदें रखता हो तो ये विधि उसके लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है. ओपन राइनोप्लास्टी के लिए नाक के बाहर चीरा लगाने के साथ ही अंदर की ओर नाक और नासिका छिद्र के बीच में एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है. फिर अन्य चीरों को मिलाकर नाक के अंदर छिपा दिया जाता है. 
 
एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स के सचिव डॉ. अनुप धीर के मुताबिक़, ‘सर्जरी के बाद आपका चेहरा सूज सकता है और आपकी नाक और आंखों के आसपास थकान और सूजन आ सकती है. हालांकि आपको चिंता करने की ज़रुरत नहीं है. आम तौर पर 3 हफ़्ते तक आपको आपनी सामान्य गतिविधियां सीमित करनी पड़ेगी. फिर आप अपनी दिनचर्या सामान्य कर सकते हैं.’
 
 
अपनाए ये सावधानियां
 
जब सर्जरी की कराने की सोच बनाई जा रही हो तो सौंदर्यबोध का लक्ष्य साफ होना चाहिए. राइनोप्लास्टी सिर्फ उसी कंडीशन में करानी चाहिए जब नाक की ग्रोथ पूरी हो जाए और वह पूरी तरह से विकसित हो जाए. आमतौर पर ऐसा 16 या 17 साल की उम्र तक हो जाता है.
 

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