नई दिल्ली. सेल्फी लेने को आज शौक नहीं जुनुन बताया जाता  है. एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में सेल्फी की वजह से होने वाली मौतें शार्क के हमलों से होने वाली मौतों से कहीं ज्यादा हैं जिसमें ऊंचाई से गिरने और चलती गाड़ी से टकराने की वजह से ज्यादा मौतें हुई है. आज ट्रेंड बन गया है कि जिसकी जितनी बढ़िया सेल्फी होगी उस पर उतने ही ज्यादा लाइक्स आऐंगे और लाइक्स बटोरने के लिए लोग कोई भी जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं. 
 
कुछ ऐसे मरें  लोग
 
अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक महिला ने कुछ अलग हटकर करना चाहा तो बंदूक के साथ सेल्फी खींचने की कश्मकश में बंदूक का ट्रिगर ही दब गया और उसे सेल्फी की कीमत अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी. रूस में एक किशोर ने रेलवे पुल के ऊपर सेल्फी लेने की सोची, इस दौरान उसका पैर फिसला और वह नीचे जा गिरा, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई. 
 
सिंगापुर में तो एक शख्स पहाड़ की चोटी पर सेल्फी खींचने में मगन था और अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नीचे जा गिरा. बुल्गारिया में बुल रन के दौरान सांडों के साथ सेल्फी खींचना भी एक शख्स को महंगा पड़ा.
 
भारत भी नहीं है पीछे
 
भारत में सेल्फी के चक्कर में जान गवांने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बता दें कि नागपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर कुही की एक झील में नाव पर सवार छात्रों के एक समूह के सेल्फी लेने के वक्त नाव संतुलन बिगड़ने से डूब गई. वही ताजमहल के सामने एक जापानी पर्यटक के सेल्फी खींचने की घटना हर किसी को याद होगी, जिसमें सेल्फी खींचने के दौरान युवक सीढ़ियों से नीचे गिर गया था और बाद में अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था.
 
दुनिया में सेल्फी के चक्कर में बढ़ती मौतों के चलते रूस ने अपने नागरिकों को आगाह करने के लिए जुलाई 2015 में ‘सेफ सेल्फी’ नाम से एक देशव्यापी अभियान की शुरुआत की थी.
 
 

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