नई दिल्ली. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और एकाकी परिवारों की वजह से इंसान खुद को अकेला महसूस करता है. मानव जीवन में सफल होने की प्रतियोगिता बढ़ती जा रही है. इस दौर में कोई भी पीछे रह जाता है तो वह तनाव में आ जाता है.
अगर इस स्ट्रेस को ठीक से मैनेज न किया जाए तो वह मानसिक रोग का कारण बन जाता है और जो धीरे-धीरे पीड़ित इंसान को अंधेरे में ढकेलता जाता है.
इसका बुरा असर इतना होता है कि कई बार लोग बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. नशा, ड्रग्स लेने जैसी आदतें लग जाती हैं. इतना नहीं लोगों इसकी वजह से खुदकुशी भी कर लेते हैं.
आम तौर पर क्या हो सकती हैं वजहें
मानसिक रोग कई तरह के हैं और इसके कारण भी अलग-अलग होते हैं. इनमें नौकरी का दबाव, पारिवारिक कलह, पति-पत्नी के बीच का झगड़ा. प्यार में नाकामी भी हो सकती है. जो आम तौर पर हर परिवार में होता है. इसके अलावा कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं जो इंसान को मानसिक रोग की ओर ले जाते हैं.
कैसे पहचाने लक्षण
जिस तरह इसके होनी की वजहें कई हो सकती हैं वैसे ही इसके एक नहीं कई लक्षण होते हैं. लेकिन सामान्य तौर पर इसके कारण आसानी से पहचाने जा सकते हैं.
 मानसिक तनाव या रोग का शिकार शख्स समाज, परिवार, दोस्तों से कटने लगता है. वह ज्यादातर अकेले रहना पसंद करता है. उसे अंधेरा कमरा ज्यादा पसंद आता है. 
बात-बात में उसे गुस्सा आता है या फिर किसी भी काम के लिए जुनून की हद भी पार कर सकता है. हो सकता है खुद को अलग दिखाने के लिए वह बेतरीब तरीके से कपड़े पहनना शुरू कर दे.  मानसिक तनाव बहुत बढ़ने पर वह नशीली गोलियां, शराब, ड्रग्स का भी इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है.
जरूरी है देखभाल
भारत में ऐसे मामलो की संख्या बढ़ती जा रही है. पीड़ित लोगों के परिवार को सदस्य इस बीमारी को आम समझने की भूल कर देते हैं ऐसे मे ंकई बार रोगी परेशान होकर खुदकुशी तक कर लेता है. ऐसे में परिवार को उसकी बहुत देखभाल की जरूरत होती है. सबसे पहले तो उसे कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिेए. कोशिश करें कि उससे ज्यादा से ज्यादा बातों में उलझा कर रखें या किसी काम में बिजी रखें.
तुरंत मिले मनोचिकित्सक से
ऐसे मामलों में तुरंत रोगी के साथ मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए क्योंकि कुछ दवाएं आती हैं जो दिमाग में तनाव बढ़ाने वाले चीजों को नियंत्रित करते हैैं साथी ही मनोचिकित्सक की सलाह इन मामलों में बहुत फायदेमंद साबित होती है.