नई दिल्ली. बोर्ड एग्जाम आते ही बच्चों में रीविजन, एग्जाम रिलेटेड सवाल और टेंशन आम बात है. एग्जाम की तैयारी के लिए बच्चे तरह तरह के फॉर्मुले अपनाते हैं. बोर्ड में अच्छे नंबर के लिए बच्चे या पेरेंट्स क्या कुछ नहीं करते, ऑनलाइन नोट्स देखते हैं, बच्चे को ग्रुप डिस्कशन में भेजते हैं, यहां तक की देर रात तक जाग कर पढ़ाई करते हैं. जिसके वजह से एग्जाम के दिनों में बच्चों में स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो जाता है और इस तरह का स्ट्रेस बच्चों के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है. 
 
कंसल्टिंग साइक्लॉजिस्ट प्रशांत भिमानी के मुताबिक एग्जाम के दिनों में नंबर को लेकर परिवार और दोस्तों की उम्मीदें बच्चों से बहुत ज्यादा हो जाती हैं. जिससे बचने के लिए बच्चे अपना कंफर्ट जोन तलाशते हैं और अपने आप को इस तरह से बना लेते है जिसकी वजह से उन्हें प्रेशर का सामना करना पड़ता है.
 
असाइन्मेंट स्ट्रेस
एग्जाम से पहले मिलनें वाले असाइन्मेंट बच्चों को और ज्यादा परेशान करते हैं. समय पर असाइन्मेंट जमा करना बच्चों के लिए एक चैलेंज होता है और इसे पूरा करने के लिए बच्चे देर रात तक जाग कर पढ़ाई करते हैं.
 
इमोश्नल स्ट्रेस
पेरेंट्स नहीं चाहते हुए भी बच्चे को एक इमोश्नल स्ट्रेस दे देते है. बच्चों के सामने इतनी सारी उम्मीद जाहिर कर देते है कि बच्चें को यह टेंशन होने लगती है कि अगर वह अपने पेरेंट्स के उम्मीद पर खरे नहीं उतरे तो क्या होगा ? ऐसे इमोश्नल स्ट्रेस की वजह से ज्यादातर स्टूडेंटस पढ़ाई में कॉन्संट्रेट नहीं कर पाते.
 
सोशियल एक्सपेक्टेशन्स
पड़ोसी से लेकर रिश्तेदार सभी बच्चों के रिजल्ट और ग्रेड के बारे में जानना चाहते हैं, जो बच्चों के स्ट्रेस की बड़ी वजह है. जब आपसे बहुत से लोग उम्मीद लगाए रहे और उनके उम्मीदों पर खरा उतरनें की कोशिश भी अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रेशऱ है.

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