भोपाल. मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के इमलिया गौंडी गांव के लोगों की जिंदगी में गौ-पालन ने बड़ा बदलाव ला दिया है. एक तरफ जहां वह लोगों के रोजगार का जरिया बन गई है, वहीं गाय की सौगंध खाकर लोग नशा न करने का संकल्प भी ले रहे हैं.
 
इस गांव के अब तक 95 फीसदी लोग नशा न करने का संकल्प ले चुके हैं. यहां के लगभग हर घर में एक गाय है. इस गाय से जहां वे दूध हासिल करते हैं, वहीं गौमूत्र से औषधियों का निर्माण कर धन अर्जन कर रहे हैं. इस तरह गांव वालों को रोजगार भी मिला है. 
 
भोपाल स्थित गायत्री शक्तिपीठ द्वारा इस गांव के जंगल में गौशाला स्थापित की गई है. इस गौशाला की खास बात है कि यह उन परिवारों को गाय भी उपलबध कराती है, जिनके पास गाय नहीं है. अभी तक 150 परिवारों को गाय उपलब्ध कराई जा चुकी है. 
 
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या का कहना है कि हमने गांव वालों से किया वादा पूरा कर दिया है. अब इसे निरंतर जारी रखने का कार्य गांव वासियों का है। बदली हुई गांव की तस्वीर आने वाले दिनों में समाज की तस्वीर बदलेगी.
 
 

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