नई दिल्लीः क्या आप भी बढ़ती महंगाई से परेशान हैं. क्या सब्जियों और अन्य घरेलू सामान की बढ़ती कीमतें आपको रुला रही हैं. तो इस खबर को पढ़ने के बाद आपको अपने देश में मिलने वाले सामान की कीमते बहुत कम लगने लगेंगी. जी हां, दुनिया का एक देश ऐसा भी है जहां महंगाई की मार ऐसी पड़ रही है कि पचास लाख देने पर भी एक किलो टमाटर मुश्किल से मिल पाते हैं. इसके अलावा बहुत सा ऐसा सामान है जो लाखों देने पर भी नहीं मिल सकता. इस देश में हर 18 दिन बाद महंगाई दोगुनी हो जाती है. यहां तक की इस देश में हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि एक बोरी नोट भरकर देने पर भी आप कुछ ज्यादा नहीं खरीद सकते.

मामला वेनजुएला का है जो पिछले पांच सालों से गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ है. जिसके चलते यहां महंगाई दर प्रत्येक 18 दिन बाद दोगुनी हो जाती है और जल्द ही इस देश की मुद्रा स्फिति दस लाख होने वाली है. जिसके चलते वेनजुएला में आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है. जिसको देखते हुए अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि वेनेज़ुएला के हालात इससे भी बदतर हो जाएंगे.

वेनेजुएला में एक किलो टमाटर की कीमत 50 लाख बोलिवर है इसके अलावा, यहां एक टॉयलेट रोल की कीमत 26 लाख बोलिवर है तो एक किलो गाजर 30 लाख बोलिवर में मिलेगी. इसके साथ ही 2.4 किलो चिकन के लिए आपको एक करोड़ 46 लाख बोलिवर चुकाने होंगे. सेनेट्री पैड के पैकेट के लिए 35 लाख बोलिवर कीमत है तो एक किलो चीज़ की कीमत आपको 75 लाख बोलिवर चुकानी पड़ेगी.

किसी वक्त में वेनेजुएला एक अमीर देश हुआ करता था जो विश्व में सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक था. लेकिन आज इस देश के हालात ऐसे हो चुके हैं कि यहां बोरी भरकर नोट ले जाने पर भी आदमी एक टाइम का भरपेट खाना नहीं खा सकता. आर्थिक संकट के चलते सरकार लगातार नोट छाप रही है जिसकी वजह से हाइपर इनफ्लेशन की स्थिति बन गई है. जिसके चलते वेनेजुएला की मुद्रा बोलिवर की कीमत घटती जा रही है और अब एक डॉलर की कीमत 35 लाख बोलिवर के बराबर हो गई है. जिसके चलते वेनेज़ुएला में एक किलो टमाटर की कीमत पचास लाख बोलिवार हो चुकी है. इसके अलावा यहां अन्य रोजमर्रा के सामान भी लाखों बोलिवर देने के बाद भी नहीं मिल पाते हैं.

कुछ ऐसा ही हाल पहले विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और पिछले दशक की शुरुआत में जिम्बाब्वे का हो गया था. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पश्चिमी गोलार्ध प्रमुख अलेक्जांद्रो वेर्नर ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि कई दशकों से वेनेजुएला की हालत खराब है. आर्थिक गाड़ी पूरी तरह पटरी से उतरी हुई है. उनका कहना है कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि वेनेजुएला सरकार बेस मनी का विस्तार कर वित्तीय घाटे में कमी लाएगी, बढते वित्तीय घाटे के चलते मुद्रास्फीति में बढोतरी लगातार जोर पकड़ रही है. धन की मांग कमजोर पड़ रही है.

वेनेजुएला में छाए आर्थिक संकट के कारण आम जनता खाने पीने के सामान के साथ रोजमर्रा की दवाइयों के लिए भी मोहताज हो चुकी है. जहां लोग बिजली पानी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं. और देश में बेरोजगारी बढ़ने के बाद अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है. जिसको देखते हुए लोग देश छोड़ कर पड़ोसी देशों में पलायन करने लगे हैं.

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