गुंटूर. एक 74 वर्षीय महिला ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन यानि आईवीएफ के माध्यम से जुड़वां लड़कियों को जन्म दिया और डॉक्टरों का कहना है कि वह बच्चों को जन्म देने वाली अब तक की सबसे बूढ़ी भारतीय हो सकती हैं. पिछली बार पंजाब की दलजिंदर कौर 2016 में 70 साल की उम्र में जन्मद देकर सबसे बूढ़ी जन्म देने वाली महिला थीं.

पूर्वी गोदावरी जिले के द्रक्षरमम ब्लॉक के नेल्लारथिप्पडु गांव के 80 वर्षीय ई राजा राव की पत्नी एरमति मंगयम्मा ने कोथपेट के अहल्या अस्पताल में लगभग 10.30 बजे जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. अस्पताल के निदेशक डॉ सनकय्याला उमाशंकर ने बच्चों की जांच की. उन्होंने बताया कि सर्जरी आसानी से हो गई. मां और शिशु दोनों स्वस्थ हैं और किसी भी तरह की परेशानी नहीं हैं. हालांकि, मां को पिछले कुछ घंटों से झेलने वाले तनाव से बाहर लाने के लिए आईसीयू में ले जाया गया है. उमाशंकर ने इसे एक दुर्लभ मामला बताते हुए कहा कि मंगयम्मा को अपनी उम्र में भी गर्भधारण करने और बच्चों को जन्म देने में कोई समस्या नहीं थी क्योंकि उन्हें मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कोई बीमारी नहीं थी.

उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि प्रसव के बाद की अवधि में उन्हें कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या होगी. हालांकि, वह बच्चों को स्तनपान नहीं करा सकती है. लेकिन कोई चिंता की बात नहीं है. हम दूध बैंक से प्राप्त दूध के साथ शिशुओं को खिला सकते हैं. उन्होंने बताया कि मंगायम्मा और राजा राव, जो एक किसान हैं, ने 22 मार्च 1962 को शादी की और पिछले 57 वर्षों से संतानहीन थे. वह कई अस्पतालों का दौरा करने के बाद भी गर्भ धारण करने के अपने प्रयासों में सफल नहीं हो सकी. लगभग 25 साल पहले मेनोपॉज के बाद भी, उन्हें मां बनने की इच्छा थी.

उमाशंकर ने कहा, पिछले साल, मंगयम्मा को अपने पड़ोस की एक महिला के बारे में पता चला, जो 55 साल की उम्र में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के माध्यम से गर्भवती हुई. उन्होंने कहा, उसने विधि आजमाने का फैसला किया और हमसे संपर्क किया. हमें उसकी इच्छाशक्ति पर आश्चर्य हुआ. हमने सभी चिकित्सीय परीक्षण किए और पाया कि वह आईवीएफ के माध्यम से गर्भाधान के लिए फिट थी.

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