बेंगलुरु. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अब तक आए नतीजे से साफ हो गया है कि राज्य में भाजपा बड़ी पार्टी बनकर उभरती नजर आ रही है लेकिन बहुमत बीजेपी के पास भी नहीं है. वहीं कांग्रेस को 78 जेडीएस को 38 और अन्य को 2 सीटें मिली हैं. ऐसे में कर्नाटक में कोई भी पार्टी अपने बलबूते पर सरकार बनाने में असमर्थ है. वहीं इस अहम समय में दोनों पार्टियां राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश कर रही हैं. सरकार बनाने का दावा करने राज्यपाल के पास पहुंचे जेडीएस के सीएम कैंडिडेट एचडी कुमारस्वामी ने राज्यपाल से मुलाकात करके कांग्रेस के समर्थन की चिट्ठी सौंपकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है. उनके साथ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और राज्य के निवर्तमान सीएम सिद्धारमैया भी थे. अब कर्नाटक में सारा पेच राज्यपाल पर फंसता दिख रहा है कि गवर्नर किसे सरकार बनाने का पहला मौका देंगे येदियुरप्पा या कुमारस्वामी?

बता दें कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला बीजेपी के मुख्य चेहरो में से एक हैं. वजुभाई का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में 2001 में आया था जब उन्होंने नरेंद्र मोदी के लिए अपनी सीट छोड़ी थी. इस दौरान वे पहली बार चुनाव में प्रत्याशी थे. अगर उनके परिवार बैकग्राउंड की बात करें तो ये वजुभाई के पिता बिजनसमैन थे. जो स्कूली समय में ही आरआरएस के संपर्क में आए. अगर इनकी शिक्षा की बात की जाए तो 26 साल की उम्र में उन्होंने कानून और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी की. इस बीच वो जनसंघ से जुडे और कई साल इस जनसंघ (अब बीजेपी) में सक्रिय रहे.

गवर्नर वजुभाई वाला गुजरात विधानसभा के 2012 से 2014 के अध्यक्ष रहे हैं. बाद में वजुभाई को गुजरात सरकार में मंत्री बनाया गया. इस दौरान इन्हें कई पदभार मिला. ये 1997 से 2012 तक वित्त मंत्री के अलावा श्रम मंत्रालय संभाला था. इसके इत्तर वह राजकोट वेस्ट सीट से कई बार विधायक चुने गए थे. बता दें इनपर कई आरोप भी लगे थे जिसकी वजह से इन्हें जेल भी जाना पड़ा था. इन पर रियल स्टेट जगत में राजकोट बिल्डर्स के साथ संबंध होने और उसकी संपत्ति बढ़ाने का आरोप लगा था. वजुभाई वाला एक बार फिर उस मोड़ पर हैं जहां उन्हें कर्नाटक के अगली सरकार का चयन करना है. अब देखना ये है कि राज्यपाल किस पार्टी को सरकार बनाने का मौका देंगे?

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