नई दिल्ली : साल 2021 में कोरोना महामारी के कारण लाखों अभ्यर्थियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. वहीं अब सुप्रीम कोर्ट में यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका दिए जाने की मांग पर सुनवाई चल रही है. इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले एक्स्ट्रा चांस पर अपना मत जाहिर किया और कहा कि वह पिछले साल यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं होने से अपना आखिरी मौका गंवा देने वाले अभ्यर्थियों को एक और अवसर देने के पक्ष में नहीं है.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा, ”हम एक और अवसर देने को तैयार नहीं है। मुझे हलफनामा दाखिल करने का समय दीजिए। कल (बृहस्पतिवार) रात मुझे निर्देश मिला है कि हम इस पर तैयार नहीं हैं।” वहीं अब इस मुद्दे पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है. साथ ही अगली सुनवाई भी 25 जनवरी, सोमवार तक स्थगित कर दी गई है.

बता दें कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कल रात, मुझे  केंद्र सरकार से जानकारी मिली कि वे कोरोना महामारी के प्रभाव के कारण अभ्यर्थियों को यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए अतिरिक्त मौका दिए जाने को लेकर सहमत नहीं हैं. मैं एक हफ्ते में शपथ पत्र पर यह कहना चाहूंगा. इस पर, पीठ ने आवेदनों की अंतिम तिथि के बारे में पूछताछ की और इसके बाद एएसजी ने सहमति व्यक्त कि वह सोमवार तक शपथ पत्र दायर करेंगे.

गौरतलब है कि यूपीएससी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) , भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) समेत की तरह की सिविल सेवओं के लिए अधिकारियों का चयन करने के लिए प्रतिवर्ष तीन चरणों में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित कराती है. वर्तमान में इस भर्ती परीक्षा के लिए आयु की न्यूनतम सीमा 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष तय की हुई है.

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