नई दिल्ली. NEET Results 2019: भारत में एमबीबीएस और डेंटल कोर्सों में प्रवेश पाने के लिए स्टूडेंट्स को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा पास करना जरूरी होता है. लेकिन जो स्टूडेंट्स नीट 2019 की परीक्षा में सफल नहीं हुए हैं वो इन कोर्सों में एडमिशन लेकर कैरियर बना सकते हैं.

ग्रेजुएशन इन वैटरनिटी साइंस एंड पशु पालन- ग्लोब्लाईजेशन के इस दौर में वैटरनिटी साइंस एंड पशु पालन के क्षेत्र एक बेहतर कैरियर है. वैटरनिटी साइंस एंड पशु पालन का कोर्स कर स्टूडेंट्स कैरियर बना सकते हैं. कई यूनिवर्सिटियां हैं जो बी.वीएससी (B.VSC) इन वैटरनिटी साइंस एंड पशु पालन में कोर्स कराते हैं.

बैचलर ऑफ फॉर्मेसी- जो स्टूडेंट्स नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा पास नहीं कर पाएं हैं वो फॉर्मेसी के क्षेत्र में अपना कैरियर बना सकते हैं. देश भर में कई ऐसी कंपनियां हैं जो फॉर्मेसी ग्रेजुएट्स को हायर करती हैं और इनमें चयनित होने वाले कर्मचारियों को मोटी पगार भी मिलती है.

पर्यावरण साइंस – उभरते हुए कैरियर के क्षेत्रों में से एक पर्यावरण विज्ञान भी है. पर्यावरण के रासायनिक और जैविक घटकों और उनके इंटरैक्शन का अध्ययन इसमें शामिल है. यह पाठ्यक्रम पर्यावरणीय मुद्दों जैसे ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन रिक्तीकरण, अपशिष्ट प्रबंधन, जल प्रदूषण पर आधारित है.

सूक्ष्म जीव विज्ञान- यह जीवाणु, कवक, वायरस आदि जैसे सूक्ष्म जीवों और उनके पर्यावरण, मनुष्यों, जानवरों, पौधों और अन्य जीवों के प्रभाव पर आधारित है. माइक्रोबायोलॉजिस्ट इस पर अध्ययन करते हैं कि विभिन्न सूक्ष्मजीव हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं.

बीएससी साइंस – बीएससी साइंस से करने वाले स्टूडेंट्स के लिए सारे विकल्प खुल सकते हैं. बीएससी साइंस सूक्ष्म जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, नर्सिंग, आनुवंशिकी या पर्यावरण विज्ञान में विशेषज्ञता प्रदान करता है.

वनस्पति विज्ञान- वनस्पति विज्ञान जीव विज्ञान की एक शाखा है. इसमें पौधों, उनकी संरचना, प्रक्रियाओं, विकास आदि का अध्ययन किया जाता है.वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में नई प्रजातियों की खोज करने के लिए अनुसंधान का अवलोकन करते हैं, पौधों और उनके विभिन्न जीवों की बातचीत का अध्ययन करते हैं पर्यावरण, पौधों का आनुवंशिक गठन आदि.

खाद्य और कृषि- यह जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं की समझ से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों से युक्त एक विस्तृत अध्ययन है जो पौधों, डेयरी और भोजन के उत्पादन को प्रभावित करता है. इसमें खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि विज्ञान, बागवानी, डेयरी प्रौद्योगिकी, कृषि इंजीनियरिंग आदि क्षेत्र शामिल हैं.

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