नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जेएनयू की बढ़ी हुई हॉस्टल फीस वापस ले ली है. पिछले 15 दिनों से जेएनयू स्टूडेंट्स हॉस्टल फीस और अन्य चार्जेस में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम ने ट्वीट कर बताया कि जेएनयू एग्जीक्यूटिव कमिटी ने अधिकतर बढ़ी हुई हॉस्टल फीस और मेस समेत अन्य चार्जेस को वापस लेने का फैसला लिया है. हालांकि यह साफ है कि जेएनयू की बढ़ी हुई पूरी हॉस्टल फीस को वापस नहीं लिया गया है. इसके अलावा कमिटी ने आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए आर्थिक सहायता की योजना भी बनाने की भी बात कही है. इस फैसले को जेएनयू स्टूडेंट्स की जीत माना जा रहा है.

पिछले करीब 15 दिनों से जेएनयू में वाम मोर्चा के छात्र नेताओं के नेतृत्व में स्टूडेंट्स फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. बुधवार को एबीवीपी संगठन ने भी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आवाज उठाई और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के सामने जाकर प्रदर्शन किया. सोमवार को जेएनयू में दीक्षांत समारोह के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. पिछले तीन दिनों से जेएनयू कैंपस छावनी में तब्दील था.

हालांकि जेएनयू प्रशासन के फीस बढ़ोतरी को वापस लेने के फैसले के बाद स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट खत्म हो गया है. जेएनयू स्टूडेंट्स इसे अपनी जीत मान रहे हैं. वहीं सोशल मीडिया पर लोग जेएनयू स्टूडेंट्स की तारीफ कर बता रहे हैं कि अपना हक वापिस कैसे लिया जाता है कोई इनसे सीखें.

यहां देखें कुछ मजेदार ट्वीट्स-

विरोध ही रक्षा का सबसे अच्छा तरीका है

जब वापिस ही लेनी थी तो बढ़ाई क्यों

वामपंथियों को हराना मुश्किल है!

कुछ आंदोलन जरूरी होते हैं

चलो सरकार ने कुछ तो सुनी

छात्र शक्ति की जीत

जेएनयू ने एक बार फिर सरकार को झुका दिया

क्या जेएनयू के अंकल और आंटी की हड़ताल खत्म हो गई है!

विपक्ष को जेएनयू स्टूडेंट्स से सीखना चाहिए

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