नई दिल्ली. स्नातक मेडिकल छात्रों को आयुष (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) प्रणालियों को 2019-20 शैक्षणिक सत्र से विषय के रूप में चुनने का विकल्प दिया जाएगा. इस बारे में जानकारी मेडिकल कॉलेजों की देखरेख करने वाले बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के एक शीर्ष अधिकारी ने दी है. इस पहल का उद्देश्य भविष्य के डॉक्टरों को चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियों से परिचित कराना है.

सरकार ने सितंबर 2018 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भंग कर दिया था और मेडिकल रेगुलेटर को सुपरसीड करने के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया था. नए पाठ्यक्रम को पिछले महीने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से अंतिम मंजूरी मिली और अगस्त से इसे लागू किया जाएगा. ये नए शैक्षणिक सत्र (2019-20) से शुरू होगा. इसके लिए 3 महीने के मॉड्यूल को आयुष मंत्रालय द्वारा डिजाइन किया जाएगा. बता दें कि आयुष मंत्रालय इसके लिए बहुत समय से कोशिश कर रहा था. 2019-20 में शुरू होने वाले सत्र में इसे लागू किया जाएगा.

इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. वी के पॉल, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, अध्यक्ष ने कहा यह एलोपैथी के छात्रों के लिए चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियां देना है. निवारक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में आयुष प्रणाली एक महान भूमिका निभा सकती है. हालांकि, यह मेडिकल छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं होगा. छात्रों को आयुष अस्पतालों का दौरा करने, आउट पेशेंट विभागों (ओपीडी) आदि में भाग लेने का मौका भी मिलेगा.’

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