नई दिल्ली. पंजाब में सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिल रहा है. इसके चलते पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स असोसिएशन की ओर से विश्वविद्यालय में कुलपति के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में पंजाब यूनिवर्सिटी के करीब 200 लेक्चरार और प्रोफेसर शामिल हुए. कॉलेज शिक्षकों की मांग है कि उन्हें 7वें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अलावा कई राज्य कर्मचारियों को भी सातवें वेतन आयोग और 7th पे मैट्रिक्स के हिसाब से सैलेरी का भुगतान किया जा रहा है, मगर पंजाब के राज्य कर्मचारी इससे महरूम हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स असोसिएशन, गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स असोसिएशन और पंजाब एग्रीकल्चर टीचर्स असोसिएशन, लुधियाना से जुड़े करीब 200 प्रोफेसरों ने वीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सातवें वेतन आयोग को लागू करने की मांग की.

पंजाब के इन कॉलेज शिक्षकों का कहना है कि राज्य सरकार 7वें वेतन आयोग के नियम जल्द से जल्द लागू करे. ताकि राज्य के शिक्षकों को भी वेतन वृद्धि का लाभ मिल सके.

इनका कहना है कि कई राज्यों ने अपने यहां सातवां वेतन आयोग लागू कर दिया है और वहां के कर्मचारियों को इसका लाभ भी मिल रहा है. मगर पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ जैसे प्रदेशों में अभी तक 7वें वेतन आयोग की सिफारिश लागू नहीं की गई है. इससे सरकारी शिक्षकों में रोष है.

दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 7वें वेतनमान के तहत कर्मचारियों को 60 साल से पहले ही रिटायर किए जाने की खबरें झूठी हैं. सरकार सेवानिवृति की मौजूदा आयु सीमा से पहले रिटायरमेंट पर कोई प्रावधान नहीं लेकर आ रही है. केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है.

पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर यह खबरें चल रही थीं कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु सीमा 60 साल से घटाकर 58 साल कर सकती है.

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