नई दिल्ली. 7th Pay Commission: पिछले काफी समय से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा वेतन वृद्धि की मांग कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार त्योहारी और चुनावी तोहफा देने जा रही है. सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही हैं कि केंद्र सरकार इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव, 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव और केंद्रीय कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन वृद्धि का ऐलान कर सकती है. लेकिन ये तय है कि ये तोहफा केंद्रीय कर्मचारियों की मांगों के अनुरुप नहीं होगा.

केंद्र सरकार के खिलाफ कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए मोदी सरकार अक्टूबर के महीने में इसका ऐलान कर सकती है. सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाएगी लेकिन उनकी मांग के मुताबिक नहीं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार न्यूनतम वेतन में वृद्धि होगी, लेकिन सीजी कर्मचारियों की मांग के मुताबिक यह 8,000 रुपये नहीं, बल्कि 2000 रुपये की होगी.

दरअसल मोदी सरकार चुनावी मौसम में पहले से नाराज कर्मचारियों को और नाराज करने का रिस्क नहीं लेना चाहती है. जिसके कारण केंद्र सरकार कर्मचारियों में फैली नाराजगी को शांत करने की कोशिश करेगी. बता दें कि देश के 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि मोदी सरकार उनकी मांग पर ध्यान दे और सातवें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित वर्तमान न्यूनतम वेतन में वृद्धि पर विचार करे. कर्मचारी संगठनों का दावा करते हैं कि वर्तमान मूल वेतन पर्याप्त नहीं है और उनकी वित्तीय स्थिति पर कोई सकारात्मक प्रभाव डालने में असफल रहा है.

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वर्तमान में 18,000 रुपये का न्यूनतम वेतन मिल रहा है. इसे वे 8000 रुपये और बढ़ाकर 26,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही मौजूदा फिटनेस कारक को 2.57 गुणा से बढ़ाकर 3.68 गुना करने की मांग कर रहे हैं.

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