7th Pay Commission: कोरोना संकट के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सातवें वेतनमान के तहत राज्य के 16 लाख कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की है. दरअसल सरकार ने कर्मचारियों को मिलने वाले 6 भत्तों को खत्म कर दिया है. कैबिनेट बाइसर्कुलेशन में इन भत्तों को खत्म करने का निर्णय होने के बाद अपर मुख्य सचिव (वित्त) संजीव मित्तल ने इसका आदेश जारी किया है. इन भत्तों के खत्म होने से कर्मचारियों की सैलरी में सालाना 2 हजार से 5 हजार रुपए की कमी आएगी.

आदेश में कहा कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण राज्य सरकार ने उन भत्तों को खत्म करने का फैसला किया है, जिन्हें केंद्र सरकार पहले ही रोक चुकी है. लेकिन राज्य सरकार की तरफ से अब तक अपने कर्मचारियों को यह भत्ते दिए जा रहे थे. योगी सरकार के इस फैसले के बाद कर्मचारियों में नाराजगी है. मालूंम हो कि 24 अप्रैल योगी आदित्यनाथ सरकार ने 6 भत्तों को 31 मार्च 2021 तक खत्म करने का फैसला किया था.

योगी आदित्यनाथ सरकार का अनुमान था कि इन भत्तों को खत्म करने से हर वर्ष राज्य सरकार के खजाने पर पड़ने वाले बोझ में 2400 करोड़ रूपए की कमी आएगी. बता दें कि योगी सरकार द्वारा सचिवालय भत्ता, नगर प्रतिकर भत्ता, जेई को मिलने वाला विशेष भत्ता, पीडब्ल्यू कर्मचारियों को मिलने वाला रिसर्च, अर्दली डिजाइन भत्ता, सिंचाई विभाग में मिलने वाला आईएंडपी, अर्दली भत्ता, भविष्य निधि लेखों के रखरखाव करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला प्रोत्साहन भत्ता को खत्म कर दिया गया है.

सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र ने कहा कि कोरोना महामारी के नाम पर जो भत्ते प्रदेश दिए जा रहे थे और जिन्हें मार्च 2021 तक टाल दिया गया था अब उसे खत्म कर दिया गया है. सचिवाल कर्मचारी संघ प्रदेश के अन्य संगठनों के साथ मिलकर योगी सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति पर काम करेगा. बता दें कि यूपी ही नहीं कई राज्यों की सरकार ने अपने खजाने पर आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कर्मचारियों के विभिन्न भत्तों और सुविधाओं में कटौती करने का फैसला कर रही हैं.

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