7th Pay Commission: कोरोना संकट के बीच तमिलनाडु सरकार ने सातवें वेतनमान के तहत राज्य के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. दरअसल तमिलनाडु सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 58 वर्ष से बढ़ाकर 59 वर्ष करने का फैसला किया है. इस फैसले से राज्य के 13 लाख से अधिक कर्मचारियों को बंपर फायदा होगा. मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी के इस इस फैसले से राज्य का कर्मचारी वर्ग खुश है. कोरोना संकट के बीच उनके लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है. राज्य सरकार का यह फैसला सभी सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, व्याख्याताओं एंव प्राध्यापकों पर लागू होगी.

बता दें कि सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि रिटायरमेंट की उम्रसीमा में वृद्धि किए जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा तत्काल प्रभाव से लागू होगी. यानी 31 मई से पहले रिटायर होने जा रहे सभी कर्मचारी भी इसे लाभांवित होंगे. इसमें राज्य सरकार से उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल होंगे. सरकार के इस कदम से उम्मीद है कि संक्रमण के प्रसार को रोकने और संक्रमित रोगियों की बढ़ती संख्या के इलाज के लिए त्वरित उपायों में मदद मिलेगी. तमिलनाडु में बुधवार को कोरोना वायरस संक्रमित लोगों की संख्या 4829 है.

तमिलनाडु सरकार का फैसला कर्मचारियों के घाव पर मरहम के समान है. कुछ दिन पहले ही राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की कोई नई किस्त नहीं देने और earned leave को इनकैश कराने को टालने का फैसला किया था. महंगाई भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं किए जाने से राज्य सरकार को करीब 7400 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है, वहीं अर्न लीव को इनकैश नहीं कराने से राज्य सरकार को करीब 2450 रुपये की बचत होगी.

हालांकि राज्य सरकार के इस फैसले का कुछ राजनीतिक दल विरोध भी कर रहे हैं. राज्य कांग्रेस ने कहा है कि इससे मौजूदा कर्मचारी तो फायदे में रहेंगे लेकिन राज्य के करोड़ों बेरोजगार युवक निराश होंगे. वे नौकरी का इंतजार रहे हैं. लेकिन राज्य सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय लोकलुभावन फैसले कर रही है.

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