नई दिल्ली, 7th Pay Commission, 7th CPC Latest News: निजी स्कूल सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार शिक्षकों को वेतन और भत्ते नहीं देने का कारण धन की कमी नहीं बता सकते हैं. दिल्ली उच्च न्यायालय के एक नवीनतम आदेश के अनुसार, इस तरह के बहाने बनाना ऐसे स्कूलों के लिए महंगा साबित हो सकता है. अदालत ऐसे स्कूलों के खातों की जांच का आदेश भी दे सकती है. हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार शिक्षकों को वेतन और भत्ते नहीं देने के कारण के रूप में धन की कमी का तर्क देने वाले एक निजी स्कूल के खाते में जांच का आदेश दिया है.

हाईकोर्ट का आदेश स्कूल के शिक्षकों की याचिका के जवाब में आया. स्कूल ने दावा किया था कि वह 2016 से लगातार वित्तीय परेशानियों का सामना कर रहा था और उसके पास कर्मचारियों और अन्य खर्चों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं था. उच्च न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया और स्कूल की खाता पुस्तकों का एक स्वतंत्र ऑडिट करने का आदेश दिया. अदालत ने स्वतंत्र जांच के लिए एक चार्टर्ड एकाउंटेंट भी नियुक्त किया है. 2016 के बाद से सीए स्कूल के खातों का लेखा परीक्षण करेगा और कोर्ट के आदेश के अनुसार तीन सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा.

अदालत ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को एक अधिकारी नियुक्त करने के लिए भी कहा है जो ऑडिट प्रक्रिया में सीए की मदद करेगा. याचिका में, स्कूल के 220 शिक्षकों और कर्मचारियों ने सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन और भत्ता की मांग की थी. उन्होंने 2016 से एरियर की भी मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन लागू करने का आदेश दिया था लेकिन उक्त स्कूल ने आदेश का पालन नहीं किया. 2017 में, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने राष्ट्रीय राजधानी में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं.

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