नई दिल्ली. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, कैग ने हाल ही में एक समीक्षा की. इस समीक्षा की रिपोर्ट में कैग ने कई बड़े खुलासे किए हैं. इसके लिए भारतीय रेल के 463 ठेकों की समीक्षा की गई. इसमें सबसे अहम खुलासा किया गया है कि केवल 23 प्रतिशत कर्मचारियों को ही न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है. इस बारे में कैग ने अपनी रिपोर्ट मंगलवार को संसद में रखी थी. बता दें कि मगंलवार को ही सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर उठाई गई मांगों को पूरा करवाने के लिए देशभर में हड़ताल की थी. कैग ने भारतीय रेल द्वारा संविदा श्रमिकों के मामले में वैधानिक अनिवार्यताओं का अनुपालन रिपोर्ट संसद में रखी. इस रिपोर्ट के अनुसार रेलवे के 463 ठेकों की समीक्षा की गई. इसमें पाया गया कि केवल 105 मामलों में ही कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 129 समझौतों के तहत संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित नहीं है. रिपोर्ट के लिए किए गए ऑडिट आकलन के मुताबिक 3,310 संविदा कर्मचारियों को 9.23 करोड़ रुपये कम का भुगतान किया गया. इसके अनुसार केवल 23 प्रतिशत मामलों में ही संविदा कर्मचारियों के लिए ही न्यूनतम वेतन के भुगतान के प्रावधान का पालन किया गया है. बता दें कि कुछ समय से रेलवे ने ठेका कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने को लेकर ठेकेदारों पर सख्ती की है.

रेलवे के नियमित कर्मचारी न्यूनतम वेतन बढ़ाने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. रेलवे कर्मचारियों की मांग है कि रेलवे न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़ाकर 26,000 रुपए कर दे. पहले ही 7वें वेतन आयोग के तहत रेल कर्मचारियों के न्यूनमत वेतन को 18,000 हजार रुपये करने का निर्णय लिया जा चुका था. लेकिन रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक ये कम है. रेल कर्मचारियों के संगठनों और ट्रेड यूनियनों की मांग है कि न्यूनतम वेतन कम से कम 26, 000 किया जाना चाहिए.

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