Jharkhand News: झारखंड के गढ़वा में इन दिनों जंगल के रास्ते खतरा गांवों तक पहुंचता दिख रहा है. पहले जंगली हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ाई और अब बाघ की दस्तक ने दहशत और बढ़ा दी है. रंका, भंडरिया, चिनिया, बड़गढ़ और रमकंडा के जंगलों में बाघ और हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीण सहमे हुए हैं. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में बाघ ने आधा दर्जन से ज्यादा पशुओं को अपना शिकार बनाया है.
रंका के ढेगुरा जंगल में बाघ ने तीन बकरियों और एक बछड़े को मार डाला. इसके अलावा भंडरिया इलाके से भी पशुओं के शिकार की सूचना सामने आई है. घटनाओं के बाद ग्रामीणों में डर है कि कहीं बाघ जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाके में न पहुंच जाए.
जंगल में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग की टीम एक्टिव हो गई है. गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है. उनके मुताबिक भंडरिया और बलीगढ़ इलाके से भी बाघ की सूचना मिली है. वन विभाग की टीमें लगातार जंगल में सर्च और निगरानी कर रही हैं.
हाथियों का भी आतंक
बाघ की मौजूदगी के बीच जंगली हाथियों ने भी ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ा रखी है. पिछले चार दिनों में रंका और चिनिया इलाके में हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है. दोनों को हाथियों ने कुचलकर मार डाला. इसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और लोगों ने सड़क जाम कर विरोध जताया.
वन विभाग का कहना है कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक घर है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए सावधानी जरूरी है. विभाग ने लोगों से शाम और अहले सुबह जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की है.
साथ ही वन क्षेत्र में अकेले जाने से बचने और किसी भी वन्यजीव की सूचना तत्काल वन विभाग को देने को कहा गया है. फिलहाल बाघ और हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग की टीमें नजर बनाए हुए हैं.
(झारखंड से मनीष मेहता की रिपोर्ट)