झारखंड के पारसनाथ पर्वत पर प्रवेश और मंदिर में दर्शन को लेकर विवाद अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है. गैर-जैन श्रद्धालुओं के कथित तौर पर मंदिर और पर्वत क्षेत्र में जाने से रोके जाने के मामले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. विरोध करने वालों का कहना है कि यदि पारसनाथ पर्वत या मंदिर में प्रवेश को लेकर कोई निर्धारित धार्मिक मर्यादा अथवा आधिकारिक नियम है, तो उसकी जानकारी श्रद्धालुओं को नीचे प्रवेश स्थल पर ही स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, ताकि किसी तरह की विवादित स्थिति ऊपर जाकर उत्पन्न न हो.
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
वहीं, सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें एक महिला कथित तौर पर यह कहते हुए नजर आती है- ‘यहां आपके शिवजी बैठे हैं क्या?’ इस तरह की टिप्पणी को लेकर लोगों का कहना है कि धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए किसी भी देवी-देवता या धर्म का उपहास नहीं किया जाना चाहिए. विरोध कर रहे लोगों की मांग है कि श्रद्धालुओं को रोकने, उनके साथ अभद्र व्यवहार करने या कानून हाथ में लेने की किसी भी घटना की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए.
मंदिर में जबरन प्रवेश पर उठे सवाल
हालांकि, इस पूरे विवाद में यह स्पष्ट होना भी जरूरी है कि पारसनाथ पर्वत और संबंधित धार्मिक स्थलों पर गैर-जैन श्रद्धालुओं के प्रवेश को लेकर वास्तव में क्या आधिकारिक नियम लागू हैं. नियम क्या हैं, उन्हें कौन लागू करता है और किन क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति या प्रतिबंध है. प्रशासन को इसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए. साथ ही, किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेकर जबरन मंदिर में प्रवेश करने या किसी को बलपूर्वक रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
Parasnath is sacred enough that even a chant from another faith is considered an insult. It’s time for Jains to put its money where its mouth is. Buy the entire hill from the government, whatever the price. Build our own rules, control access, and preserve it exactly as we want. https://t.co/QabuFp70sZ
— Abhay Jain (@Abhayjain_) August 19, 2026
सोशल मीडिया पर क्यों विवाद?
धार्मिक आस्था और अधिकारों से जुड़े विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए. अब नजर प्रशासन और झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग पर है कि इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं या नहीं. साथ ही, विवादित वीडियो और कथित अभद्र व्यवहार की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है. पारसनाथ की धार्मिक गरिमा भी बनी रहे और श्रद्धालुओं के अधिकार एवं निर्धारित नियम भी स्पष्ट रहें इसी संतुलन के साथ विवाद का समाधान जरूरी है.