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झारखंड के ‘मिनी लंदन’ में बनेंगे होमस्टे जो पर्यटकों को विक्टोरियन एरा की दिलाएंगे याद; सरकार करेगी सहायता, मिलेगा ब्याज मुक्त लोन

झारखंड सरकार मिनी लंदन के नाम से मशहूर मैक्लुस्कीगंज को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है. सरकार यहां होमस्टे बनाने के लिए लोगों को ब्याज मुक्त लोन भी प्रदान करेगी.

By: Shivangi Shukla | Published: July 17, 2026 12:36:07 PM IST



झारखंड सरकार ‘मिनी लंदन’ के नाम से मशहूर मैक्लुस्कीगंज (McCluskieganj) को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रही है.

16 जुलाई को नगर विकास, आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू मैक्लुस्कीगंज पहुंचे और डाक बंगला में एंग्लो-इंडियन समुदाय तथा स्थानीय ग्रामीणों के साथ पर्यटन विकास को लेकर विस्तृत बैठक की. इस बैठक में कई निर्णय लिए गए. आइये जानते हैं उसके बारे में!

बनेंगे 50 होमस्टे; सरकार करेगी सहायता 

बैठक में मंत्री ने शामिल सदस्यों को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी होमस्टे योजना की जानकारी दी और कहा कि योजना के पहले चरण में यहां 50 होमस्टे विकसित किए जाएंगे, जो ‘विक्टोरियन शैली’ से प्रेरित होंगे. उन्होंने कहा कि इच्छुक परिवार अपने घरों के खाली कमरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त होमस्टे के रूप में विकसित कर सकते हैं. इन होमस्टे के निर्माण और विकास के लिए सरकार आर्थिक रूप से सहायता भी करेगी. बता दें कि प्रत्येक कमरे के लिए ₹4 लाख तक का ब्याजमुक्त बैंक ऋण मिलेगा. 

इस लोन का पूरा ब्याज राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि लाभुकों को केवल मूल राशि आसान किस्तों में चुकानी होगी. समय पर भुगतान करने पर लोगों को सब्सिडी का भी लाभ मिलेगा. उन्होंने बताया कि योजना के तहत गोल्ड श्रेणी में चार तथा डायमंड श्रेणी में छह कमरों तक के होमस्टे बनाए जा सकेंगे. सभी चयनित होमस्टे को झारखंड पर्यटन की वेबसाइट पर सूचीबद्ध किया जाएगा, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों तक उनकी सीधी पहुंच बनेगी.

मैक्लुस्कीगंज के बारे में 

मैकलुस्कीगंज (McCluskieganj) झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 65 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित प्रकृति की गोद में बसा एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है. अपनी प्राकृतिक सुंदरता और औपनिवेशिक इतिहास के कारण इसे ‘झारखंड का मिनी लंदन’ या ‘मिनी इंग्लैंड’ भी कहा जाता है. 1930 के दशक में, कलकत्ता के एक एंग्लो-इंडियन व्यवसायी अर्नेस्ट टिमोथी मैकलुस्की ने इस जगह को एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए एक अलग ‘मुल्क’ के रूप में बसाया था. उस समय घने जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे इस इलाके का तापमान लंदन जैसा महसूस होता था. कभी यहाँ 400 से अधिक एंग्लो-इंडियन परिवार रहा करते थे, लेकिन आज़ादी के बाद इनमें से अधिकांश लोग विदेश चले गए.

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