नई दिल्ली: भारत में 12 हज़ार से ज्यादा ट्रेनें रोज़ चलती हैं और 2.5 करोड से ज्यादा यात्री रोज़ सफर करते हैं. ऐसे में भारतीय रेल चलाना और कायदे से चलाना बच्चों का खेल तो नहीं लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं कि आप यात्री से पैसा ले लें और उसे खराब खाना परोस दें, एक्सपायरी खाना खिला दें, गंदे किचन में बना खाना खिला दें.
 
सीएजी यानि कम्पट्रोलर एंड ऑडिट जनरल ने जब रिपोर्ट बनाय़ी तो सबके होश फाख्ता हो गए. उस रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि भारतीय रेल में जिस क्वालिटी का खाना कई बार परोसा जाता है वो बेहद दोयम दर्जे का होता है, गंदा होता है और नुकसानदेह होता है. 
 
 
सीएजी की रिपोर्ट 3 दिन पहले आई है और अगर हालात सुधारने की इच्छाशक्ति हो तो तीन दिन बहुत होते हैं. लेकिन ट्रेनों में मिलने वाले खाने की हालत सीएजी की रिपोर्ट और उसपर मचे हो हंगामें के बाद भी जस की तस है. किसी की थाली में कील निकल आए या किसी के खाने में कीड़ा हो तो बात छोटी नहीं है लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं है कि हर ट्रेन में यही हाल है और हर थाली का यही हाल है.
 
ट्रेन टाइम पर नहीं आती आदमी वेट कर लेता है. ट्रेन लेट पहुंचाती है, आदमी एडजस्ट कर लेता है लेकिन ट्रेन में मिलने वाला खाना भी घटिया मिले वो भी पैसा देने के बाद भी तो कोई कैसे बर्दाश्त करे औऱ क्यों करे. छोटे छोटे बच्चे तक ट्रेन में सफर कर रहे होते हैं. क्या ये उनके स्वास्थय से खिलवाड़ नहीं है. 
 
बता दें कि संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रेनों और स्टेशनों पर परोसी जा रही खाने की चीजें दूषित होती हैं. चाय, कॉफी और सूप बनाने के लिए सीधे नल से गंदे पानी का इस्तेमाल होता है. खाना बनाने के लिए भी साफ पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. ट्रेनों की पैंट्री कार में खाने की चीजें ढंककर नहीं रखी जाती, जिससे उसमें मक्खी, कीड़े और धूल लगते रहते हैं. 
 
 
रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि डिब्बाबंद और बोतलबंद चीजें को एक्सपायरी डेट के बाद भी ट्रेनों में बेचा जाता है. ट्रेनों में खाने पीने की चीजों की क्वालिटी चेक के लिए सीएजी और रेलवे की ज्वाइंट टीम ने जांच की है. जिसके बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया गया. इस टीम ने देश भर के 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों का मुआयना किया. 
 
बता दें कि भारतीय रेलवे दुनिया की चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है. भारतीय रेलवे के पास 11 हजार से अधिक इंजन और 70 हजार से अधिक पैसेंजर हैं. साल 2015-16 के आंकडे के मुताबिक 13,313 यात्री हर रोज लगभग सात हजार स्टेशनों के बीच पटरी पर दौड़ती है. जिसमें लगभग दो करोड़ बीस लाख यात्री सफर करते हैं. 
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)

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