नई दिल्ली: भारत-चीन के हालात सुधर नहीं रहे और सुधरने के हालात बनेंगे तो कैसे. चीन की दबाव बनाने की रणनीति नई नहीं है लेकिन जिस तरह की तल्खी सीमा पर दिख रही है वो कुछ मायनों में नई ज़रुर है. हफ्ते भर के अंदर कई ऐसे बयान आ चुके हैं चीन की तरफ से जिनमें 1962 के युद्ध की याद दिलाने से लेकर मौजूदा हालात में भारत क्या चाहता है. 
 
भारत भी चीन को याद दिला चुका है कि भारत 1962 वाला भारत नहीं है लेकिन सच ये भी है कि पलक झपकने को फिलहाल दोनों मुल्कों में से कोई तैयार नहीं दिखता. हांलाकि जल्द ही जी-20 समिट में पीएम मोदी और चीन के प्रमुख शी जिनपिंग आमने सामने होंगे, और वहां क्या बात होती है और क्या रास्ता निकलता है ये तो वक्त तय करेगा.
 
 
इससे पहले का सच ये है कि फिलहाल तो भारतीय सैनिक और चीनी सैनिक आमने सामने हैं. पिछले 48 घंटों के भीतर चीन की तरफ से तीन बयान आए हैं. दिल्ली में चीन के राजदूत लू झाओहुई ने 4 जुलाई को कहा कि गेंद पूरी तरह भारत के पाले में है और भारत को ये तय करना है कि किन विकल्पों के साथ इस गतिरोध को खत्म किया जा सकता है. सैन्य टकराव या बातचीत से हल, लेकिन किसी भी बातचीत के लिए पहले सेना हटानी ही होगी.
 
दूसरा बयान चीनी विदेश मंत्रालय का है, जो बीजिंग में दिया गया. गेंग शुआंग ने कहा कि मुझे ये कहना है कि डोकलान इलाका प्राचीन काल से चीन का है. बिना किसी विवाद के ये हिस्सा चीन का रहा है. भूटान के साथ इसे लेकर हमारी 24 राउंड की बातचीत हो चुकी है.
 
 
इसके साथ दिल्ली में मौजूद चीनी राजदूत लू झाओहुई ने एक और बयान दे दिया. राजदूत ने कहा कि पहली प्राथमिकता ये होनी चाहिए कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में बिना किसी शर्त के वापस चले जाएं. भारत और चीन के बीच बातचीत के जरिए मसला सुलझाने से पहले ये होना जरूरी है.
 
मतलब चीन ने खुद विवाद किया, खुद मामले को आगे बढ़ाया और अब खुद फैसला भी दे रहा है. वो कह रहा है कि विवाद तो है ही नहीं. क्योंकि जहां विवाद है वो तो सब उसी का है. जबकि हकीकत ये है कि भारत के सैनिक अपनी बाउंड्री में खड़े हैं. डोकलाम का विवाद भूटान और चीन के बीच ज्यादा है.
 
 
चूंकि भूटान की सुरक्षा और विदेश मामलों की जिम्मेवारी 1949 की संधि के मुताबिक भारत तय करता है. लिहाजा भारत ने इस मामले में दखल दी है. वैसे इसकी एक और वजह भी है. जो भारत की अपनी सुरक्षा हितों से जुड़ी है. एक बात और अभी जो आप बार-बार डोकलाम-डोकलाम सुन रहे हैं. दरअसल उसे तीन नामों से जाना जाता है.
 
 
हिन्दुस्तान में इसे डोकलाम बोला जाता है, भूटान में इसे डोका ला बोला जाता है, जबकि चीन इसे डोगलोंग बोलता है. अब सवाल ये उठता है कि चीन और भारत के सिक्किम बॉर्डर पर जहां से बार-बार सैनिकों के गुत्थमगुत्था होने की ख़बरें आ रही हैं वो विवाद है क्या ? 
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)

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