नई दिल्ली: हाल के दिनों में बॉर्डर पर भारत और चीन के बीच तनाव बढा है. खासतौर पर जब से पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मिलकर लौटे हैं ? भूटान बॉर्डर पर धक्कामुक्की और हाथापाई से आगे बढ़कर अब  ड्रैगन आग उगल रहा है.
 
चीन भारत को 1962 का युद्ध याद दिला चुका है और भारत के वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली चीन को याद दिला चुके हैं कि भारत 1962 वाला भारत नहीं है. गुत्थगुत्थी और धक्कामुक्की करती ये दुनिया की दो ताकतवर आर्मी के सैनिक हैं. तीसरी ताकतवर आर्मी चीन, चौथी ताकतवर आर्मी इंडिया. ये धक्का-मुक्की चुंबी घाटी में हो रही है, इसी घाटी में डोकलान है.
 
भारत, चीन और भूटान यहां तीन देशों का बॉर्डर लगता है. हालात को देखते हुए भारत ने अपनी दो रेजिमेंट को अलर्ट कर रखा है. 17 वीं और 23 वीं रेजिमेंट. जबकि चीन ने अपनी 141 वीं रेजिमेंट से PLA की बड़ी टुकड़ी मौके पर भेज रखी है. दोनों सेनाएं खड़ी हैं.
 
 
भारत कह रहा है कि वो एक इंच पीछे नहीं खिसकेगा. जबकि चीन कह रहा है कि भारत के साथ कोई भी बातचीत तभी हो सकती है जब वो सेना पीछे हटाए. कहा जा रहा है कि तनाव अगर खत्म नहीं हुआ तो इस बात की आशंका है कि चीन किसी झड़प की तरफ आगे बढ़े.
 
भारत से टकराव का मतलब है चीन का 4 बिलियन डॉलर से जुआ खेलना, 4 बिलियन डॉलर इसलिए कि माना जाता है कि भारत में चीन का निवेश 4.07 बिलियन डॉलर है. एक बिलियन डॉलर बराबर 6700 करोड़ होता है. इस तरह से 4 बिलियन डॉलर बराबर हुआ 268 अरब रुपए. 
 
 
ये वो चीनी पैसा है जो भारत में लगा हुआ है और इसमें मिनट-मिनट की बढ़ोतरी हो रही है. खबर है कि हिंदुस्तान से बढ़ते तनाव के बीच अब चीन की वो लॉबी तेजी से सक्रिय हो गई है जिनका अरबों रुपया हिंदुस्तान में लगा हुआ है या वो निवेशक, उद्योगपति भारत से टकराव नहीं चाहते जिन्होंने हिन्दुस्तान में पैसा लगाने की योजना बना रखी है.
 
चीन का रोज़गार, भारत के बाज़ार से फलफूल रहा है. इतना ही नहीं चीन से विदेशों में घूमने जाने वाले पर्यटकों में भी भारत को लेकर रूचि पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है और ये बढ़ोतरी अब इतनी है कि इसे नोटिस किया जा सकता है. लेकिन इस मोर्चे पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.
 
 
हालत ये है कि चीन पर विश्वास जमे उसके पहले चीन ऐसा कुछ कर देता है कि विरोध-प्रदर्शन होने लगता है. बीती दीवाली में चीन को भी पता चल चुका है कि भारत और भारतीय विरोध पर उतर आएं तो क्या हो सकता है. दिवाली के मौके पर चीन से करीब 29 अरब डॉलर मतलब पौने दो लाख करोड़ के सामान का आयात हुआ था.  ऐसा एक अनुमान है. जिसका बड़ा हिस्सा डंप हो गया. दिवाली चीन को 29 हजार करोड़ के नुकसान हुआ.  
 
 
दुनिया की तमाम बड़ी रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दशक में भारत की इकॉनॉमी चीन से आगे निकल जाएगी और चीन में इस बात की छटपटाहट है. चीन को अगर खुद को बनाए रखना है उसे नए बाजार चाहिए जो भारत के पास हैं। चीनी बैंकों को नए क्लाइंट चाहिए ऐसे उद्योगपति भारत में है जो पैसे उधार लें और ब्याज दें.
 
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