नई दिल्ली: गोरक्षा के नाम पर कहीं किसी को पीट पीटकर मार दिया जा रहा है तो कहीं किसी का घर जला दिया जा रहा है और ऐसे में ये सवाल उठना ज़रुरी है. सवाल सिर्फ़ हमारे आपके मन में ही नहीं उठ रहा बल्कि देश के प्रधानमंत्री के मन में भी उठ रहा है कि ये देश में हो क्या रहा है ? 
 
गोरक्षा के नाम पर जो गुंडागर्दी हो रही है वो पीएम मोदी की अपील के बाद भी क्यों रुक नहीं रही ? हिन्दुस्तान में सबसे तेजी से सामने आई वो समस्या है, जो सबसे नई है और जिसमें देश के प्रधानमंत्री तक को चिंता में डाल रखा है. झारखंड के रामगढ़ शहर में भीड़ ने एक वैन में से खींचकर ड्राइवर मो.असगर को मार डाला और वैन में आग लगा दी. सिर्फ इसलिए कि इन्हें शक था असगर की कार में बीफ है. जिसे वो चितरपुर से नईसराय ले जा रहा था.
 
लोगों का आरोप है कि आए दिन इलाके में गोहत्या हो रही है. पुलिस-प्रशासन को खबर करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई. लिहाजा भीड़ ने अपनी दहशतगर्दी दिखाई. जिसमें जानवर की वजह से इंसान को मार डाला गया.
 
गोरक्षा के नाम पर बड़ी वारदातें 
# 27 जुलाई 2016 – मंदसौर में दो महिलाओं की रेलवे स्टेशन पर पिटाई 
– महिलाओं के पास गोमांस होने का शक 
– दोनों महिलाएं मुस्लिम 
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# 20 जुलाई 2016 – उना में दलित समुदाय के 7 लोगों की सरेआम पिटाई
– मरी गाय की खाल निकालने के बाद हंगामा
– पीटे गए लोग दलित 
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# 22 जून 2016 -मथुरा में ट्रक में आग लगा दी 
 NH-2 को घंटों जाम रखा 
– बवाल की वजह ट्रक में 30 मरी हुई गायें 
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#  10 जून 2016 – गुड़गांव में बीफ स्मगलिंग के आरोप में जबरदस्ती गाय का गोबर और मूत्र पिलाया गया 
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# 3 जून 2016- राजस्थान के प्रतापगढ़ में 150 गोरक्षकों ने 3 लोगों की पिटाई की 
– गोकुशी के लिए गाय की तस्करी का आरोप 
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# 27 मार्च 2016 – कुरुक्षेत्र में मर्डर
– बैलों को खेत में काम के लिए ले जा रहा था, आरोप लगा गोकुशी के लिए बैल ले जा रहा 
 
सवाल ये है कि गोरक्षकों पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही, क्यों ये दिन ब  दिन खतरनाक होते चले जा रहे हैं. क्यों ये सरेआम दहशतगर्दी करते हैं और फिर भी बच निकलते हैं. वजहें कई हैं. मसलन राजनीतिक इच्छाशक्ति का कमजोर होना. समाजिक ताने-बाने का बिगड़ना. गोरक्षकों से निपटने के लिए कानून में क्या प्रावधान है ?
 
गोरक्षकों के लिए कोई कानून नहीं ? 
IPC में गोरक्षकों से निपटने के लिए अलग से कानून का प्रावधान नहीं 
IPC में Lynching से निपटने के लिए अलग से कानून नहीं 
गोरक्षकों से निपटने के लिए भीड़ से निपटने वाले कानून का ही इस्तेमाल
CCP की धारा 223( A) के तहत गोरक्षकों से निपटा जाता है 
CCP की धारा 223 (A) में ज्यादातर भीड़ पर चार्ज लगाया जाता है
भीड़ पर चार्ज लगाने में आरोपी को बचने में सहूलियत होती है 
 
मोदी की अपील का गोरक्षकों पर असर नहीं ?
# गोरक्षकों की गुंडागर्दी 86% तब बढ़ी जब केन्द्र में बीजेपी सरकार 
# 63 गोरक्षा गुंडागर्दी के मामले में से 32 बीजेपी शासित राज्यों में ( 50%) 
# गोरक्षकों की गुंडागर्दी के 8 मामले कांग्रेस शासित राज्यों में 
# गोरक्षकों की गुंडागर्दी के मामले में 52% केस के पीछे वजह अफवाह थी
# 2016 की तुलना में 2017 के पहले छह महीने में गोरक्षकों की गुंडागर्दी 75% बढ़ी 
# 2010 से 2017 के बीच 28 भारतीय की मौत का आरोप गोरक्षक गुंडों पर 
# उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में गोरक्षक गुंडों का कहर कम 
# गोरक्षकों की गुंडागर्दी के 5% मामले में कोई केस तक दर्ज नहीं 
# गोरक्षकों की गुंडागर्दी के 21% मामले में पुलिस ने पीड़ित पर ही केस दर्ज किया
# गोरक्षकों की गुंडागर्दी के 23 मामले में सीधा आरोप कट्टर हिंदू संगठनों पर ( 36% मामले) 
 
चाहे कोई हो कानून हाथ में लेने का हक इस देश में किसी को नहीं होना चाहिए. ऐसा ही पीएम ने भी कहा है और जो कानून हाथ में ले उससे सख्ती से निपटा जाए तो गोरक्षकों की गुंडागर्दी रोकी जा सकती है. तामिलनाडु में गोरक्षकों वालों पुलिस का ऐसा डंडा चला कि उनके होश ठिकाने आ गए.
 
गोरक्षा-गोरक्षा के नाम पर गुंडई जब दिल्ली से करीब ढाई हजार किलोमीटर दूर शुरु हुई तो पुलिस ने बता दिया कि ये तो यहां नहीं चलेगा. गोरक्षा के नाम पर गुंडई करने वाले एक-एक शख्स की जमकर धुनाई हुई. जो जहां मिले जैसे मिला वैसे मारा. 
 
पहली बार गो रक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले गुंडों से ज्यादा पुलिस दिखाई दे रही है. लग रहा पुलिस पहले से तैयार थी कि कुछ भी हो जाए गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कम से कम यहां तो नहीं चलने देंगे. ये वारदात तमिलनाडु के पलानी की है. अब तक गो रक्षक के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले भारी पड़ते थे लेकिन यहां पहली बार दूसरा पक्ष भी मजबूत था.
 
बताया जा रहा है कि एक शख्स पुधु-धरमपुर रोड पर मिनी वैन में बछड़े और बैल ले जा रहा था. जिसे रास्ते में एक शख्स ने देखा तो उसे पलानी थाने ले आया. शिकायत की गई कि बछड़ों को बिना खाना-पानी दिए वैन में बंद रखा गया. देखते-देखते तथाकथित गो रक्षा के नाम पर गुंडे इकठ्ठे हो गए लेकिन दूसरा पक्ष भी अड़ गया. दूसरे पक्ष का कहना था कि कुछ भी गलत नहीं है, ऐसे गुंडागर्दी करोंगे तो छोड़ेंगे नहीं. जब दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए तो फिर पुलिस वाले ने धुनाई शुरु कर दी. शायद पहली बार लग रहा है कि यहां पुलिस अपनी जगह पर सही है.
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)

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