नई दिल्ली : प्राइवेट स्कूलों में मनमाने तरीके से बच्चों के परिजनों से पढ़ाई के नाम पर फीस ली जा रही है. नया सत्र शुरू हो रहा है तो नई किताबों का वक्त है, ऐसे में ज्यादातर स्कूल फिर अभिभावकों को लूट रहे हैं. जो किताबें आपको बाहर किसी दुकान में 2 से ढाई हजार में मिल जाएंगीं उन्हीं किताबों के लिए स्कूल साढ़े तीन से चार हज़ार तक वसूल रहे हैं.
 
इतना ही नहीं, कॉपी तक पर स्कूल का मोहर लगाकर उसे बाजार से महंगे दाम पर बेचा जा रहा है. ऊपर से स्कूल से ही सब खरीदने का दबाव अलग. अब ये बिजनेस नहीं है तो क्या है. हांलाकि सारे के सारे स्कूल ऐसा कर रहे हों ये जरूरी नहीं लेकिन ज्यादातर निजी स्कूल्स में ये हो रहा है और ऐसे में मोटी फीस देने के दबाव में पिस रहा आम आदमी करे तो करे क्या.
 
इतना ही नहीं, फीस न देने या देरी होने पर आज कल बच्चों को स्कूल से निकाल देने का फरमान भी पोस्ट से भेज दिया जा रहा है. मसला बहुत गंभीर है और इसलिए इस जवाब तो देना होगा में आज हमारा सवाल इसी मुद्दे पर है.
 
 
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