नई दिल्ली: जवाब तो देना होगा में आज सवाल समाजवादी पार्टी का जिसने यूपी में जैसी हार देखी वैसी उसने अपने इतिहास में नहीं देखी और सवाल ये कि क्या अखिलेश यादव पार्टी को 20 साल पीछे ले गए हैं. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं ये आपको विस्तार से समझाएंगे लेकिन उससे पहले आपको बता दें कि आज समाजवादी पार्टी की एक चिंतन बैठक हुई है.
 
हार के बाद चिंतन सबसे अच्छा ज़रिया होता है समझने का कि हार की वजहें क्या रहीं लेकिन उस पार्टी के लिए ये काम चिंतन से कहीं आगे का हो जाता है जिसने चुनाव के पहले ज़बरद्स्त घरेलू घमासान देखा हो. सबको याद है कि कैसे अखिलेश यादव ने पिता मुलायम से कमोबेश ज़बरदस्ती पार्टी अध्यक्ष पद और पार्टी की कमान दोनों ले ली थी लेकिन नतीजों ने साबित कर दिया कि यूपी की सियासत में बाप कौन है और बेटा कौन.
 
उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह की अध्यक्षता में समाजवादी पार्टी ने कभी ऐसी ढलान नहीं देखी जैसी 2017 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में देख ली है. आपको कुछ आंकड़े दिखाते हैं जो बताएंगे कि यूपी में जब सपा के कैप्टन मुलायम थे तो मायावती की आंधी भी पार्टी की वो हालत नहीं कर पाई थी जैसी अखिलेश यादव की कैप्टेन्सी में हुई है.
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)
 
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