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क्या बदल गई मुसलमानों की सोच या Mamata से हैं खफा? क्या BJP ले गई मुस्लिम वोट बैंक; यहां समझे बंगाल का समीकरण

West Bengal Muslim Vote: असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक के चुनावी नतीजे सामने आ चुके हैं. अब साफ है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने पूरी तरह से जीत दर्ज कर ली है और ममता को करारी मात दी है. हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि ममता बनर्जी अपने गढ़ में भी हार गईं है.

By: Heena Khan | Published: May 6, 2026 8:02:14 AM IST



West Bengal Muslim Vote: असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक के चुनावी नतीजे सामने आ चुके हैं. अब साफ है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने पूरी तरह से जीत दर्ज कर ली है और ममता को करारी मात दी है. हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि ममता बनर्जी अपने गढ़ में भी हार गईं है. जहां एक तरफ बंगाल में जश्न का माहौल है वहीँ लोग हैरान है कि आखिर कैसे BJP को भरपूर मुस्लिम वोट मिल गया. इस समय पश्चिम बंगाल से लेकर असम तक, मुस्लिम वोट एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा. चुनावी रैलियों, जनसभाओं और उम्मीदवारों के नामों के ऐलान के दौरान दिए गए बयानों में इस मुद्दे की खूब चर्चा हुई. वहीं अब सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कायव बीजेपी को मुस्लिम का अच्छा खासा साथ मिल गया. 

बंगाल में कितने मुस्लिम विधायक जीते 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पश्चिम बंगाल में  कुल 293 विधानसभा सीटों में से 36 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं. इनमें से ज़्यादातर जीतने वाले  उम्मीदवार ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हैं. वहीं अगर बात करें असल की तो यहां  ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने जिन 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था, उनमें से 31 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. साथ ही आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी के भी दो मुस्लिम विधायक अपनी-अपनी सीटें जीतने में कामयाब रहे. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और लेफ्ट फ्रंट का भी एक-एक मुस्लिम विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचा. वहीं दूसरी ओर, हुमायूं कबीर जिन्होंने बंगाल में अपने चुनाव प्रचार के दौरान बाबरी मस्जिद के मुद्दे को मुख्य मुद्दा बनाया था. उन्होंने खुद जिन दो सीटों से चुनाव लड़ा था, उन दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की.

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आखिर क्यों नहीं मिला ममता को मुस्लिम का साथ 

इन सबके बीच पश्चिम बंगाल में हारी ममता को लेकर अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या ममता बनर्जी इस बार मुस्लिम वोट बैंक को पूरी तरह अपने पक्ष में करने में नाकाम रहीं? या फिर इस चुनावी चक्र के दौरान बंगाल का मुस्लिम वोट बैंक कई हिस्सों में बंट गया? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनावी नतीजों के पीछे मुस्लिम वोट बैंक का इस तरह बंट जाना ही एक अहम कारण है. यह कहा जा रहा है कि मुस्लिम वोट कांग्रेस, TMC, ISF, हुमायूँ कबीर की पार्टी और वामपंथी पार्टियों के बीच बँट गया. नतीजतन, TMC को मुर्शिदाबाद जैसे ज़िलों में भी काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा. 

मालदा से ममता को नुक्सान 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पश्चिम बंगाल के मालदा में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं. हैरानी की बात ये है कि BJP ने इनमें से 6 सीटों पर जीत दर्ज की है. जो 2021 की तुलना में 2 सीटों का फ़ायदा है. जबकि TMC को 2 सीटों का नुकसान हुआ है. यह ध्यान देने वाली बात है कि मालदा की कुल 39 लाख की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 51.3 प्रतिशत है. मालदा में विशेष सारांश संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान, मतदाता सूची से 2,39,000 नाम हटा दिए गए थे. इसका मतलब है कि हर विधानसभा क्षेत्र से औसतन 19,948 मतदाताओं के नाम हटाए गए. आरोप लगाया जा रहा है कि इस ज़िले में मुस्लिम वोट TMC, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के बीच बँट गया.

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